जहाँ तुमसे है माँ…

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पुष्पांजलि शर्मा।

तुम साथ हो तो माँ… कुदरत भी साथ है,
तुम्हारे बिना दिन भी रात है…

तुमसे दूर भी जाऊँ तो तुम्हारा साया मेरे साथ है…
मेरे लिए मेरी माँ… तू ही सारी कायनात है…

हर गलती को तुमने हंस कर कबूल किया…
मेरी नादानियों को भुला तूने, अपनी ममता का छांव दिया…

दिन-रात पालन-पोषण कर तूने हमें बड़ा किया…
परिस्थितियों में जब घिरने लगी… तूने सहारा दे मुझे खड़ा किया…

तेरे दामन में वफाओं के फूल हैं…
ममता की छाव तले तेरे क़दमों की धूल है…

ये कामयाबी इज्जत सब नाम तुमसे है…
ईश्वर ने जो भी दिया मुझे, वो मुकाम तुमसे है…

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वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…


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