वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…

नीलम सिंह।

वो लड़की… वो लड़की बहुत बड़ी हो गई …
जो कल तक अकेले बहार निकलना ना जानती थी,
वो आज दिल्ली की सड़कों पर अकेले घूमना सीख गई,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…

वक़्त से पहले सब कुछ जीना सीख गई,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई….
जो हर रोज स्कूल जाने से पहले और आने के बाद रो-रो कर घर सर पर उठा लेती थी,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…

आज लोगों से वो अपने अाँसू छिपाना सीख गई,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…
आँखों में नमी और होठों पर प्यारी सी मुस्कान लेकर जीना सीख गई,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…

यह भी पढ़ें -   जंगल में मिली ऐसी लड़की, देखकर हो जाएंगे हैरान

जो कल तक छोटी सी चोट लगने पर घर पर सबको परेशान कर देती थी,
वो आज हर दर्द को सहना सीख गई,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…

वो आज हर अच्छे-बुरे वक़्त में मुस्करना सीख गई,
एक लड़की के सब्र और हिम्मत की तुम क्या बराबरी करोगे,
दुनिया उससे रूलाना नहीं छोड़ेगी और वो हँसना नहीं छोड़ेगी,
वो…वो लड़की बहुत बड़ी हो गई…

लेखिका- नीलम सिंह , (डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज), इस कविता की लेखिका को पढ़ना और लिखना बेहद पसंद है। वे अपनी मौलिक भावनाओं को कविता के जरिए हमेशा व्यक्त करती रहती हैं। साथ ही वो अपने ब्लॉग के माध्यम से भी अपनी लेखनी को लगातार पाठकों के सामने प्रस्तुत करती रहती हैं।

यह भी पढ़ें -   आंधी नहीं तूफ़ान हैं बेटियाँ

मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें और ट्विटरगूगल प्लस पर फॉलो करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *