व्यावसायिक शिक्षा भारतीय समाज के लिए कितना घातक?

व्यावसायिक शिक्षा

व्यावसायिक शिक्षा भारतीय समाज के लिए कितना घातक? आज के समय में पढ़े-लिखे न होने पर मनुष्य को जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व और तात्पर्य बिलकुल ही बदल गया है। आज के समय में शिक्षा का व्यावसायीकरण हो गया है। व्यावसायिक शिक्षा ही आज ज्यादा महत्वपूर्ण और प्रबल हो गई है।

यह कहना सही है कि शिक्षा समाज को प्रभावित करता है। शिक्षा मनुष्य के अंदर सदगुणों को भी विकसित करता है। इससे मनुष्य के अंदर नए विचारों, आकांक्षाओं का जन्म होता है। मनुष्य को जीवन में आगे बढ़ने में मदद मिलती है। इसके बदौलत मनुष्य अच्छे बुरे के भेद को पहचान पाता है। यही कारण है कि एक शिक्षित मनुष्य के अंदर अच्छे संस्कारों को आसानी से भरा जा सकता है। शिक्षा ही वो मूलभूत इकाई है जिसके सहारे मनुष्य आगे बढ़ता है। इसी की वजह से मनुष्य अन्य पशु-पक्षियों से खुद को भिन्न रखता है।

आज तमाम शैक्षणिक संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। देश में मौजूद ज्यादातर संस्थान व्यावसायिक शिक्षा की ओर अपना रूझान कर चुके हैं। हालांकि सामाजिक शिक्षा की जरूरत समाज को आज भी है। यदि समाजिक शिक्षा पूरी तरह से विलुप्त हो गया तो वह समय उस समाज के लिए अत्यंत ही भयावह और विनाशक होगा।

यह भी पढ़ें -   बेपरवाह और संवेदनहीन सिस्टम ने 'देश के निर्माता' को सड़क पर छोड़ा

आज के समय में ज्यादातर विश्विविद्यालय व्यावसायिक शिक्षा दे रहे हैं। परंपरागत और नैतिक शिक्षा तो न के बराबर रह गया है, क्योंकि आज हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छा अंग्रेजी बोले और पढ़ाई के बाद किसी अच्छी जगह पर नौकरी करे। माता-पिता और समाज के इस सोच ने व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया है।

भारत में शिक्षा का महत्व प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण रहा है। भारत प्राचीन काल से ही शिक्षा का केंद्र बिंदू रहा है। पूर्वकाल में भारत में बड़े-बड़े विश्वविद्यालय भारत की शान में चार चांद लगाते थे। लेकिन समय के साथ सबकुछ धीरे-धीरे खत्म हो गया। अब सिर्फ अवशेष मात्र शेष रह गए हैं। यह अवशेष ही आज हमें प्राचीन काल के शिक्षा से अवगत करवाते हैं या यूं कहें कि शिक्षा का भारत में कितना गौरवपूर्ण इतिहास रहा है, इससे आज के युवाओं को अवगत करवाते हैं।

युवाओं में लोकप्रिय होता व्यावसायिक शिक्षा का कारण

1. समाज में व्यावसायिक शिक्षा को महत्व दिया जाना

यह भी पढ़ें -   नैतिकता का पाठ दुष्कर्म की मानसिकता को खत्म कर सकता है?

भारतीय समाज में आजादी के बाद बड़े बदलाव हुए हैं। देश आजाद हुआ तो लोगों के विचार भी आजाद होने लगे। लोगों में सुख-सुविधाओं की चाहत बढ़ी है। जिसे पाने का एक मात्र सहारा है व्यावसायिक शिक्षा। बच्चे व्यावसायिक शिक्षा हासिल कर जॉब करते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ती करते हैं। समाज भी आजकल उन्हीं लोगों को ज्यादा महत्व देता है जिसके पास नाम, दौलत और शोहरत होती है।

2. व्यावसायिक शिक्षा के बाद रोजगार मिलने में आसानी

आजकल बच्चे को जन्म के साथ ही उसे क्या बनना है, इसकी प्रेरणा के माता-पिता के द्वारा दी जाती है। यही कारण है कि बच्चों और छात्रों में व्यावसायिक शिक्षा को लेकर आकर्षण इस वजह से भी बढ़ी है, क्योंकि व्यावसायिक शिक्षा हासिल करने के बाद उन्हें रोजगार मिलने में आसानी होती है। छात्र आज के दौर में नैतिक शिक्षा या सामाजिक शिक्षा से ज्यादा व्यावसायिक शिक्षा में रूचि लेते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं की चाहत ने मनुष्य को इस ओर धकेल दिया है।

3. नौकरीपेशा लोगों को समाज में ज्यादा सम्मान मिलना

आजादी के बाद से भारतीय समाज में बहुत परिवर्तन हुए हैं। सबसे ज्यादा परिवर्तन लोगों के रहन-सहन और विचारों में हुआ है। आज समाज उन लोगों को ज्यादा इज्जत और मान-सम्मान देता है जिसके पास ज्यादा धन-संपदा हो। जो लोग किसी सरकारी संस्थान में रोजगार करते हैं उन्हें समाज सम्मान भरी नजरों से देखता है। वैसे लोगों की समाज में बड़ी इज्जत होती है। समाज ऐसे लोगों को अपने आंखों पर बिठाकर रखती है। नौकरी करने वाले लोगों को ही समाज द्वारा पूछा जाता है। अन्य क्षेत्रों के लोगों का समाज में महत्व नहीं मिलता है या कम मिलता है।

यह भी पढ़ें -   दिल्ली में हिंसा का मंज़र जो बीते दिनों सामने आया वो वाकई दिल दहला देने वाला है...
सामाजिक शिक्षा को कैसे बचा सकते है?

आज भारत की ख्याति विश्व में लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में जब व्यावसायिक शिक्षा की वजह से सामाजिक और नैतिक शिक्षा का नाश हो रहा है, उसे एक नई दिशा देने की आवश्यकता है ताकि सामाजिक शिक्षा को बचाया जा सके। व्यावसायिक शिक्षा को पूरी तरह से हम खत्म नहीं कर सकते। लिहाजा इसी शिक्षा में सामाजिक शिक्षा को भी निहित कर समाज में एक सार्थक मूल्य की स्थापना की जा सकती है। इससे देश का हर युवा अपनी समाजिक, नैतिक व संस्कृतिक जिम्मेदारियों को समझ सकेगा और उससे व्यवहार में ला सकेगा।