विदाई समारोह में बोले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, संसद को बार-बार बाधित न करें

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नई दिल्ली। वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित एक भव्य समारोह में विदाई दी गई। विदाई समारोह में सभी गणमान्य नेता मौजूद थे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का स्वागत उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने किया। विदाई समारोह में सभी नेताओं ने राष्ट्रपति मुखर्जी के लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखने में उनके योगदान को याद किया।

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विदाई समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवानी, पूर्व  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। विधाई समारोह में अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि ‘यह हम सभी के लिए राष्ट्रपति मुखर्जी के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने का एक सुअवसर है।’ जबकि वर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि उन्होंने अक्सर लोगों से स्वयं को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित करने की अपील की।

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अपने संबोधन में हामिद अंसारी ने राष्ट्रपति मुखर्जी के भारत के विचार में उनके अटल विश्वास के लिए प्रशंसा की। राष्ट्रपति के सम्मान में उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने देश की ‘सबसे बड़ी ताकत’ के तौर पर बहुलवाद और विविधता पर जोर दिया। उन्होंने शीर्ष पद की काफी प्रतिष्ठा और गरिमा बढ़ाई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनके विचारों ने इस पद का कद बढ़ाया है।’

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विदाई समारोह के आयोजन के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी सांसदों को धन्यवाद किया और आभार व्यक्त किया। उन्होंने संसद की कार्यवाही को बाधित करने के मामले में कहा कि सांसदों को संसद की कार्यवाही को बार-बार बाधित करने से बचना चाहिए। इससे विपक्ष को अधिक नुकसान होता है। साथ ही मुखर्जी ने यह भी कहा कि सरकार को भी अध्यादेश का रास्ता बार-बार अपनाने से बचना चाहिए। इसे किसी अपरिहार्य परिस्थितियों के लिए बचाकर रखना चाहिए।

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विदाई समारोह में अपने राष्ट्रपति भवन में बिताए गए पलों को याद करते हुए कहा कि ‘मैं इस भव्य इमारत से खट्टी मिट्ठी यादों और इस सुकून के साथ जा रहा हूं कि मैंने इस देश के लोगों की उनके एक सेवक के तौर पर सेवा की।’

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