रामनाथ कोविंद ने ली राष्ट्रपति पद की शपथ, पढ़ें उनके संघर्षों के बारे में

नई दिल्ली। एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले चुके हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2017 को संसद भवन में राष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति बनने के बाद रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमारा देश सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। राष्ट्रपति का पद गरिमामय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति नागरिकों में प्रथम होता है। सभी को मिलकर इस पद की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैंने अपने जीवन में लंबा संघर्ष किया है। संघर्ष के बाद ही आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा, “मेरे गांव में ना सड़क, ना ही स्कूल था, कोई भी सुविधा नहीं थी उस समय।  पर हमारे देश में ऐसे कई गांव हैं। हमलोग पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई किया करते थे।” उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली सिर्फ सिविल सर्विस में इच्छा के तौर पर कुछ करने के लिए आया था। दो ट्राई के बाद मैंने अटेंप्ट में पास किया था। लेकिन बाद में मैंने वकालत करने का फैसला किया।

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शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद की गरिमा को बरकरार रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। जो अभी तक इस पद की गरिमा बनी हुई है, यही अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि आशा करता हूं कि हर देशवासी इसमें अपना आशीर्वाद देगा। शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति कोविंद ने सभा का आभार किया। उन्होंने कहा कि मुझे भारत के राष्ट्रपति का दायित्व सौंपने के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं। मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण करता हूं।

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उन्होंने आगे कहा कि सेंट्रल हॉल में आकर पुरानी यादें ताजा हुई, सांसद के तौर पर यहां पर कई मुद्दों पर चर्चा की है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि मैं मिट्टी के घर में पला बढ़ा हूं और मेरी ये यात्रा काफी लंबी रही है।

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