जानिए… क्या है खासियत दिल्ली के कनॉट प्लेस में

पुष्पांजलि शर्मा, नई दिल्ली। कनॉट प्लेस दुनिया का पांचवां सबसे महंगा बाजार है और यह बाजार अपने समय में भारत का सबसे बड़ा बाजार था। आपको बता दें कि आजादी से पहले कनॉट प्लेस ब्रिटिश राज्य का मुख्यालय हुआ करता था। जैसा कि हम जानते हैं कि दिल्ली भारत का दिल है उसी प्रकार कनॉट प्लेस दिल्ली का दिल है।

कऩॉट प्लेस का नाम ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। कनॉट प्लेस को राजीव चौक के नाम से भी जाना जाता है। दिल्ली घुमना हो तो शुरुआत कनॉट प्लेस यानी राजीव चौक से ही करनी चाहिए।

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कनॉट प्लेस नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बहुत नजदीक है। इसके अलावा यहां राजीव चोक मेट्रो स्टेशन भी है। कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क राजीव चोक मेट्रो स्टेशन के एकदम ऊपर बना हुआ है। सेंट्रल पार्क कई सांसकृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। वर्ष 2014 में यहाँ सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।शान से लहराता हुआ तिरंगा लोगों को देश भावना के प्रति आकर्षित करता है।

कनॉट प्लेस राजधानी की वह जगह है। जहां लाइव म्यूजिक सुनने के साथ-साथ डिस्कोथेक, रेस्टोर बार और पब में पार्टी इत्यादि का आनंद भी ले सकते हैं।

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