डोकलाम पर भारत की बड़ी जीत, डोकलाम से पीछे हटी चीनी सेना

indias-big-victory-dolaam

नई दिल्ली। बीते दो महीनों से ज्यादा समय तक जारी डोकलाम गतिरोध खत्म होने को है। भारत की रणनीतिक दवाब के आगे चीन झुक गया है। दोनों देश अपनी-अपनी सेनाएं हटाने को तैयार हो गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रविश कुमार इस फैसले पर विदेश मंत्रालय का बयान ट्वीट किया है। इस घटनाक्रम को भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है क्योंकि भारत शुरू से ही डोकलाम पर तटस्थ रवैया अपनाते हुए बातचीत के पक्ष में था। लेकिन चीन लगातार डोकलाम को लेकर युद्ध की धमकियां देता रहता था।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से हो रही बातचीत में भारत ने चीन को अपनी चिंताओं से वाफिक कराया जिसके बाद सेनाएं हटाने का फैसला हुआ है। भारतीय सेना ने सोमवार को डोकलाम के आसपास के क्षेत्र से सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चीन भी अपने सैनिकों को वहां से हटा रहा है। लगभग तीन महीने के लंबे गतिरोध के बाद दोनों तरफ से सैनिकों को हटाने पर सहमति बनी है।

China ready withdraw 100 meters Docmal

 

यह भी पढ़ें -   चीनी सेना ने भारत को दी धमकी, पीछे हटे भारत, अब सब्र टूट रहा

बता दें कि डोकलाम एक पठारी इलाका है। जिसे चीन अपना बताता है। लेकिन भूटान का कहना है कि वह इलाका उसका है। लेकिन इस दावे को नहीं मानता है। समय-समय पर चीन इस इलाके में अपनी सैनिकों को भेजता रहता है। हाल ही में यह विवाद तब शुरू हुआ जब चीन ने इस इलाके में सड़क बनाने का काम शुरू किया। डोकलाम भूटान के हा घाटी, भारत के पूर्व सिक्किम जिला, और चीन के यदोंग काउंटी के बीच में है। डोकलाम विवाद का मुख्य कारण उसकी अवस्थिति है। यह एक ट्राई-जंक्शन है, जहाँ भारत, चीन और भूटान कि सीमा मिलती है। हालांकि भारत का इस क्षेत्र पर कोई दावा नहीं है। लेकिन भूटान से दोस्ती के संबंध के कारण भारत ने वहां अपने सैनिकों को तैनात किया।

यह भी पढ़ें -   कोरोना वायरस: चीन में मरने वालों की संख्या 131 पहुंची, 840 लोग संक्रमित

दरअसल चीन जिस इलाके में सड़क का निर्माण कर रहा है वो इलाका भारत के चिकन नेक के बहुत करीब स्थित है। भारत शुरू से चीन को अपनी चिंताओं से अवगत कराता रहा है। लेकिन फिर भी चीन ने सड़क निर्माण जैसी गतिविधि को अंजाम दिया। दरअसल इस क्षेत्र को लेकर चीन भूटान के बीच में विवाद है। इस मसले पर विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘बीते कुछ सप्ताह डोकलाम पर हुई घटना के बावजूद भारत और चीन ने इस मुद्दे पर राजनयिक संपर्क बनाए रखा। इस वजह से हम अपने विचारों को व्यक्त कर सके और अपनी चिंताओं व हितों को साझा कर पाए।’

यह भी पढ़ें -   खुलासा: 2002 में भारत पर परमाणु हमला करना चाहते थे मुशर्रफ, लेकिन डर के मारे कर न सके

यह भी पढ़ें: