गले के कैंसर से बचने के उपाय, तुरंत ही इन चीजों का सेवन बंद करें

गले का कैंसर बचाव

कैंसर की बीमारी का नाम सुनते ही लोगों को कई तरह के ख्याल आने लगते हैं। कैंसर की बीमारी कई तरह की होती है। उनमें से एक है गले का कैंसर। गले के कैंसर से बचने के कई उपाय हैं। गले का कैंसर तब होता है जब हमारी सांस लेने वाली कोशिकाएं, बोलने वाली कोशिकाएं और भोजन के निगलने वाली कोशिकाएं असामान्य रूप से विकसित होने लगती है। जानिए इससे बचाव के उपाय।

गले के कैंसर से बचने के उपाय

गले के कैंसर से बचने के उपाय हैं। यदि समय रहते इसपर अमल किया जाए तो गले के कैंसर से बचा जा सकता है।

यह भी पढ़ें -   हरी सब्जी की हो कमी तो बारिश के मौसम में ट्राई करें यह ऑप्शन

धूम्रपान न करें – जो लोग अक्सर ही धूम्रपान करते हैं उन्हें गले का कैंसर होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है। सिगरेट और बीड़ी का सेवन करने वाले लोगों को इसका सेवन कम कर देना चाहिए या नहीं करना चाहिए। जो लोग इसका सेवन नहीं करते हैं लेकिन इसका धुआं जाने-अनजाने उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है तो यह भी नुकसानदायक होता है। कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान न करें।

तम्बाकू का सेवन करने से भी गले का कैंसर की समस्या होती है। इसे इसका प्रमुख कारण माना जाता है। तम्बाकू के सेवन से सांस लेने वाली नली पर विपरित असर पड़ता है। इसके गले का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। गुटखा, पान मसाला और खैनी खाने से भी गले का कैंसर होने का खतरा रहता है। इसलिए इन सबका सेवन बंद कर दें।

यह भी पढ़ें -   खुजली के घरेलू उपाय - इन घरेलू उपायों को अपनाने से मिलेगी राहत

शराब पीने से भी कैंसर होने का खतरा होता है। वैसे तो शराब की ज्यादा मात्रा लेने से कई तरह के नुकसान होते हैं। जो व्यक्ति शराब के साथ-साथ धूम्रपान का सेवन भी करता है उसे गले का कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है। शराब में अल्कोहल और सिगरेट में निकोटीन होता है।

अल्कोहल और निकोटीन को एक साथ लेने से मैलिग्नेंट कोशिकाएं बढ़ जाती है। यही कोशिकाएं आगे चलकर गले के कैंसर का कारण बनती हैं। इसलिए अल्कोहल और निकोटीन का सेवन किसी भी रूप में नहीं करना चाहिए।

यह भी पढ़ें -   इलायची के फायदे - ब्लड प्रेशर, एसिडिटी और फेफड़ों की परेशानी करे दूर

प्रदूषित वातावरण में लगातार रहने से भी गले का कैंसर होने का खतरा होता है। कई बार हमारे शरीर के अंदर डस्ट, वुड डस्ट, कैमिकल डस्ट, रोड डस्ट के कण प्रवेश कर जाते हैं। यह कैंसर के कारण बनते हैं। हवा में मौजूद सल्फर डाई ऑक्साइड, क्रोनियम और आर्सेनिक भी कैंसर के खतरे को बढ़ाने का काम करते हैं।