नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच हुए गलवान विवाद के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत पर शिकंजा कसने के लिए बड़ा आदेश दिया है। तिब्बत पर शिकंजा कसने के लिए पांच साल बाद हुई बैठक में शी जिनपिंग ने सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में शी ने कहा कि तिब्बत सीमा पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता में होनी चाहिए। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पार्टी, सरकार और सैन्य नेतृत्व को सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और सुरक्षा सुनिश्चत करने को कहा। इसके साथ-साथ भारत के साथ लगती सीमा वाले क्षेत्रों में सुरक्षा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
तिब्बत पर चीन ने 1950 में किया था कब्जा
हाल के दिनों में हुई झरपों और विवाद में सीमा पर मुंह की खाने के बाद चीन अपनी सीमा की सुरक्षा को लेकर चिंतित है और इसको लेकर चीन के राष्ट्रपति के अंदर चिंता और बेचैनी है।
बता दें कि तिब्बत पर चीन ने 1950 में कब्जा कर लिया था। चीन और भारत की सीमा का ज्यादातर हिस्सा तिब्बत से जुड़ा होने के कारण चीन की चिंता बढ़ी है। हालांकि इतिहास पर नजर डालें तो चीन ही हमेशा सीमा पर विवाद बढ़ाने का कार्य करता है। गलवान के पहले डोकलाम में भी चीन इस तरह का विवाद कर चुका है।
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गलवान विवाद के बाच तिब्बत पर चीन की बैठक
गलवान विवाद के बाद पहली बार तिब्बत को लेकर चीन में इतनी बड़ी बैठक हुई है। इससे पहले तिब्बत पर 2015 में बैठक हुई थी। चीन में तिब्बत पर आयोजित सातवें केंद्रीय सेमिनार में शी जिनपिंग ने इसपर चिंता व्यक्त किया। शीन ने लोगों को जागरूक करने का आदेश देते हुए कहा कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए अलगाववाद के खिलाफ अभेद्य किले का निर्माण करें।

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