शनिवार को चांदी खरीदना चाहिए या नहीं, जानें चांदी खरीदने का शुभ दिन

शनिवार को चांदी खरीदना चाहिए या नहीं

Shanivar ko Chandi Kharidna Chahiya Ya Nahi – शनिवार को चांदी खरीदना चाहिए या नहीं? इस प्रकार का सवाल कई बार लोगों के मन में आता है। आज इसी विषय के बारे में जानेंगे कि क्या शनिवार को चांदी खरीदना चाहिए? इस दिन चांदी या फिर सोना जैसे धातुओं को खरीदने से हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? ऐसा माना जाता है कि शनिवार के दिन कोई भी धातु खरीदने से बचना चाहिए।

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शादी-विवाह और कोई भी मांगलिक कार्य जिसमें धातु चढ़ाया जाता है, उसे खरीदने से पहले अक्सर हम लोग शुभ मुहूर्त देखते हैं। सोना या फिर चांदी को शरीर पर धारण किया जाता है, इसलिए इसे खरीदने से पहले शुभ मुहूर्त देखना अनिवार्य माना जाता है।

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शनिवार को चांदी खरीदना चाहिए या नहीं

बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो शनिवार के दिन कोई भी वस्तु खरीदना पसंद नहीं करते हैं। ऐसा माना जाता है कि शनिवार के दिन लोहा या लोहे से बनी हुई कोई भी वस्तु नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शनिवार के दिन लोहा और लोहे से बनी हुई वस्तुओं को खरीदने से घर में अनिष्ट होने की संभावना होती है।

हालांकि हिंदू धर्म शास्त्रों में कुछ खास दिनों में धातु खरीदना शुभ माना जाता है। अगर सोना या फिर चांदी को त्रिपुष्कर योग में खरीदा जाए तो यह शुभ फल प्रदान करता है। त्रिपुष्कर योग भद्रा तिथि, रविवार, मंगलवार और शनिवार को त्रिपुष्कर नक्षत्र में पड़ने से होता है। त्रिपुष्कर योग में यदि शनिवार का दिन आता है तो उस दिन भी सोना या चांदी खरीदा जा सकता है।

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सोना या चांदी किस दिन खरीदना होता है शुभ

यदि आप सोना-चांदी खरीदना (Shanivar ko Chandi Kharidna Chahiye Ya Nahi) चाहते हैं तो हमेशा शुभ दिनों में ही इसे खरीदना अच्छा होता है। सोना को अक्षय तृतीया के दिन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। ऐसा होने से आपके घर में सुख-शांति बढ़ती है और घर में रहने वाले लोगों के जीवन में आर्थिक उन्नति होती है।

बता दें कि शनिवार के दिन भगवान शनिदेव की पूजा की जाती है। यह दिन भगवान शनिदेव को समर्पित है। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति पर शनिदेव प्रसन्न होते हैं तो उन्हें जीवन में कई प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। कलयुग में शनिदेव का प्रभाव बहुत अधिक है। ऐसे में व्यक्ति को पापकर्म करने से हमेशा बचना चाहिए और जहां तक संभव हो सके, लोगों और दुखियों की मदद करना चाहिए।

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