कोरोना का नया वेरिएंट बना काल, दुनिया के कई देशों में फैला, जानें सबकुछ

कोरोना का नया वेरिएंट

कोरोना महामारी से अभी दुनिया पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाई है। ऐसे में कोरोना के नए-नए वेरिएंट लोगों की मुसीबतों को और बढ़ा रहा है। एक के बाद एक कोरोना की लहरों से जूझ रही दुनिया के लिए एक और चिंता वाली खबर है। भारत में भी कोरोना वायरस के नए मामले 30 से 40 हजार के बीच आ रहे हैं। अब दुनिया में कोरोना का नया वेरिएंट सामने आया है।

अब कोरोना का एक और नया वेरिएंट SARS-CoV-2 मिला है। यह वेरिएंट सबसे पहले साउथ अफ्रीका और फिर कई दूसरे देशों में पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह ज्यादा संक्रामक है और वैक्सीन के असर से बचा रहता है। साउथ अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) और क्वाजुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म (KRISP) के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वेरिएंट का पता मई में देश में पहली बार पता चला। वेरिएंट को C.1.2 नाम दिया गया है।

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13 अगस्त तक यह वेरिएंट चीन, रिपब्लिक ऑफ दि कांगो, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट कैटेगरी का है। WHO के मुताबिक वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट कोरोना के ऐसे वैरिएंट हैं जो वायरस के ट्रांसमिशन, गंभीर लक्षणों, इम्यूनिटी को चकमा देने, डायग्नोसिस से बचने की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

एक स्टडी में में बताया गया है कि C.1.2 इससे पहले मिले C.1 के मुकाबले काफी हद तक म्यूटेट हो चुका है। C.1 को ही दक्षिण अफ्रीका में कोरोना की पहली लहर के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

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रिसर्चर्स ने पाया है कि नए वैरिएंट में दुनिया भर में मिले वैरिएंट ऑफ कंसर्न और वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट से ज्यादा म्यूटेट हुआ है। स्टडी में खुलासा हुआ है कि साउथ अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसकी संख्या मई में 0.2% से बढ़कर जून में 1.6 % और फिर जुलाई में 2 % हो गई।