प्रकृति ने स्त्री-पुरुष को बराबर बनाया है, इन्हें ऐसे ही रहने दें, तभी ये धरती खूबसूरत होगी

किसी स्त्री के आत्मविश्वास को तोड़ने वाले, उसके मनोबल को गिराने वाले, उसकी ज़िंदगी पर अपना जजमेंट सुना देने वाले, आईएएस, आईपीएस, प्रोफेसर, डॉक्टर, वकील, बड़े संस्थान में पत्रकार या किसी बिज़नेस से अपना रुतबा, डिग्रियां और अच्छी कमाई का बैंक बैलेंस दिखाकर किसी स्त्री के सम्मान को दाव पर लगाकर शादी के नाम पर उसके सम्मान को कुचलने वाले लोगों को भी हैप्पी वीमेंस डे।

उन माता-पिता को भी हैप्पी वीमेंस डे जो बच्ची के जन्म से ही उसे ससुराल जाने के लिए पालते हैं, पढ़ाई पर इतना खर्च नही करते लेकिन दहेज के लिए पैसे जुटा लेते हैं, जो अपनी बच्ची को ये महसूस करवाते हैं कि जहां उसका जन्म हुआ वो उसका घर नही, भविष्य में कौन साथ देगा इस नाम पर डराते हैं।

उन लोगों को भी हैप्पी वीमेंस डे जो स्त्रियों को स्वतंत्रता तो देतें हैं लेकिन केवल अपनी शर्तों के अनुसार। उन पाखंडी समाजसेवियों को भी हैप्पी वीमेंस डे जो 24 घन्टें पब्लिकली तो नारीवाद पर भाषण देते हैं लेकिन नारीवादी विचारों के विपरीत व्यक्तिगत रूप से कार्य करते हैं या विपरीत बर्ताव किसी स्त्री के साथ करते हैं।

उन व्यक्तियों को भी हैप्पी वीमेंस डे जो स्त्रियों के आगे बढ़ने उनके शक्तिकरण की बात तो करते हैं लेकिन स्त्री को स्वयं से आगे बढ़ता देख वो भुनने लगते हैं। महिलाओं को अपनी दादागिरी दिखा कर डराने धमकाने वालों को भी हैप्पी वीमेंस डे।

उन तथाकथित समझदार लोगों को भी हैप्पी वीमेंस डे जिन्हें लगता है कि हाथ मे सिगरेट लिए, दारू लिए, नाइट आउट किये, और वेस्टर्न कपड़े पहने और गाली देने वाली स्त्री ही मॉडर्न और पढ़ी लिखी है और ऐसा न करने वाली लड़कियां जाहिल और पिछड़ी हैं या वो मॉडर्न नही है।

हर दिन महिलाओं का है, उनका महत्व कल भी था आज भी है और आगे भी रहेगा। महिलाओं ने कभी पुरुषों के अस्तित्व को नही नकारा न ही पुरुषों के साथ इतना बुरा किया, जितना पुरुष करते आये। प्रकृति ने स्त्री-पुरुष को बराबर बनाया है, इन्हें बराबर ही समझिए तभी ये धरती खूबसूरत होगी। अब समय बदल रहा है, अपने अस्तित्व, अपनी पहचान और अपने भविष्य के लिए स्त्रियां परिवर्तन के पथ पर निकल पड़ी हैं, उन्हें पूरा हक है हंसने का खुलकर जीने का।

✍️ “सपना”

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, हर दिन महिला सम्मान

यह लेखिका के निजी विचार हैं…

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