Categories: विचार

भारतीय मूल के ऋषि को ब्रिटिश खजाने की चाबी

अरुण नैथानी। ब्रिटेन में जब ब्रेग्जिट का तूफान थमा तो कंजरवेटिव पार्टी की आंधी आई। इस आंधी में ब्रिटिश सत्ता की जो तस्वीर बनी, उसमें भारतीय रंग चटख होकर निखरे। यह हर भारतीय के लिये गौरव का क्षण है कि जिस ब्रिटेन का भारत सदियों गुलाम रहा, आज उस देश की अर्थव्यवस्था व गृह व्यवस्था भारतीय प्रतिभाओं के हाथ में है।

बॉरिस जॉनसन सरकार में वित्त और गृह मंत्रालय भारतीय मूल की मेधाओं ने संभाले हैं। ब्रिटिश सरकार में नंबर दो की हैसियत में माने जाने वाले वित्तमंत्री का जिम्मा युवा तुर्क ऋषि सुनक को मिला है। वे कंजरवेटिव पार्टी में मजबूत नेता के रूप में उभरे हैं। उनमें ब्रिटेन के भावी नेता की भूमिका तलाशी जा रही है।

सचमुच कितना मुश्किल होता है किसी परिवार का भारत से उखड़ना, फिर पूर्वी अफ्रीका होते हुए ब्रिटेन में बसना। नई जमीन पर अपने जड़ें जमाना और फिर इतनी ऊंचाई हासिल कर लेना कि दुनिया अचरज में पड़ जाये।  उस देश के खजाने का रखवाला बनना, जिस पर हमारा खजाना ले जाने के चर्चे होते हैं।

ऋषि सुनक का पहला परिचय यह है कि वे बहुचर्चित भारतीय आईटी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद हैं। मगर उन्होंने अपनी जमीन खुद तैयार की है। उनके चिकित्सक पिता और फार्मासिस्ट मां ने बेटे को संवारने में खून-पसीना एक किया। उन्होंने भी माता-पिता के साथ स्थानीय समुदाय की खूब सेवा की। कामयाबी रातों-रात नहीं आती, उसके मूल में लंबी तपस्या भी होती है।

हालांकि, ऋषि सुनक के सामने चुनौतियों का पहाड़ है। ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना आसान नहीं होगा। ब्रिटेन के वित्तीय वर्ष में बजट की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्हें अगले कुछ सप्ताह में बजट पेश करना है।

दरअसल, सुनक यॉर्कशर के रिचमंड से दूसरी बार टोरी पार्टी के सांसद चुने गये हैं। पहली बार वे वर्ष 2015 में सांसद चुने गये थे। फिर बीते साल दिसंबर में हुए चुनाव में उन्होंने दूसरी बार जीत हासिल की। इतना ही नहीं, ब्रेग्जिट पर हुए जनमत संग्रह में उनके चुनाव क्षेत्र के 55 फीसदी लोगों ने उनकी सोच के अनुरूप ब्रिग्जिट के समर्थन में वोट किया था।

नॉर्दलर्टन शहर के बाहर कर्बी सिग्स्टन में रहने वाले ऋषि सुनक के माता-पिता साठ के दशक में पूर्वी अफ्रीका से ब्रिटेन आये थे। जो मूल रूप से पंजाब के रहने वाले थे। उनके पिता ने बतौर चिकित्सक और मां ने फार्मासिस्ट के रूप में ब्रिटिश समाज की बड़ी सेवा करके प्रतिष्ठा हासिल की।

वर्ष 1980 में 12 मई को हैंपशर के साउथैम्टन में जन्मे ऋषि कुशाग्र बुद्धि के छात्र थे। शुरुआती पढ़ाई विशिष्ट निजी स्कूल विंचेस्टर कॉलेज में हुई। कालांतर वे उच्च शिक्षा हासिल करने ऑक्सफोर्ड गये जहां उन्होंने अर्थशास्त्र, दर्शन और राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की। इसके उपरांत स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री हासिल की।

दरअसल, राजनीतिक पारी खेलने से पहले ऋषि ने इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स में दायित्व निभाए। साथ ही एक साझेदार के साथ एक अरब पाउंड की निवेश फर्म भी स्थापित की। परिवार में पत्नी अक्षता और दो बेटियां हैं। सुनक गर्व से कहते हैं कि मैं अपने परिवार का पहली पीढ़ी का अप्रवासी हूं। मैं अपनी एशियाई पहचान पर गर्व करता हूं। वे यह बात सिरे से खारिज करते हैं कि उन्हें किसी तरह के रंगभेद का सामना करना पड़ा। उन्हें भारतीय पहचान पर गर्व है। यहां तक कि संसद सदस्य की शपथ उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता को लेकर ली।

दरअसल, ऋषि ब्रेग्जिट के प्रबल समर्थक रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री टेरिसा मे के कार्यकाल के दौरान ब्रेग्जिट के समर्थन में तीन बार मतदान किया। वे बॉरिस जॉनसन के शुरुआती समर्थकों में जाने जाते हैं। उन्हें जॉनसन का करीबी माना जाता रहा है। यहां तक कि मीडिया व टीवी डिबेट में वे जॉनसन का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।

दरअसल, ऋषि की वित्तीय क्षमताओं को खासी तरजीह दी जाती है। जुलाई 2019 में उन्हें वित्त मंत्रालय का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। जबकि इससे पूर्व वे स्थानीय सरकार में कुछ अन्य भूमिका निभा सके थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि ऋषि सुनक टोरी पार्टी के एक उदीयमान सितारे हैं। यहां तक कि पार्टी के पुराने दिग्गज उन्हें असाधारण क्षमताओं का धनी मानते हैं।

अपनी फिटनेस को लेकर सजग रहने वाले सुनक प्रगतिशील विचारों के व्यक्ति हैं। उनका मानना कि किसी भी व्यवस्था में हर व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए। भारतीय संस्कारों में अगाध आस्था रखने के बावजूद सप्ताह के अंत में वे मंदिर के साथ चर्च जाना भी नहीं भूलते। वे ब्रिटिश समाज की समरसता के कायल हैं।

नि:संदेह विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था की बागडोर संभालने वाले 39 वर्षीय ऋषि सुनक के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। विश्वास है कि अपनी प्रतिभा और सजगता के बूते वे इनसे पार पा सकेंगे। नि:संदेह ऋषि छोटी और उद्यमी ब्रिटिश कंपनियों को विकसित करने में हासिल सफलता के अनुभव से अर्थव्यवस्था में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा व हेल्थ के लक्ष्यों को पाने में सफल होंगे।

Share

Recent Posts

Free Fire Redeem Code: 24 January 2022 का फ्री फायर रिडीम कोड कैसे प्राप्त करें

Free Fire Redeem Code: फ्री फायर गेम का रिडीम कोड कैसे प्राप्त करें। आज इस…

Desiremovies Websites List 2022: जहां से नई South Movies Pushpa हुई लीक

Desiremovies Website List 2022: Tamil Rockers की तरह ही Desiremovies Websites भी हाल की रिलीज…

धर्मयात्रा महासंघ के 28 वें स्थापना दिवस व मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हवन पूजन का कार्यक्रम

धर्मयात्रा महासंघ के 28वें स्थापना दिवस व मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हवन पूजन…

This website uses cookies.

Read More