Happy Teachers Day 2019: जानिए देश के पहले उपराष्ट्रपति की कुछ खास बातें

भारत में शिक्षक दिवस (Happy Teachers Day 2019) देश के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर मनाया जाता है। (Happy Teachers Day 2019) राधाकृष्णन का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में हुआ था। उन्हें बचपन से ही किताबें पढ़ने का बड़ा शौक था। वे बचपन में स्वामी विवेकानंद से काफी प्रभावित थे। सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1975 को हुआ था।

भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन दुनिया को एक ईकाई मानते थे। वे चाहते थे कि शिक्षक छात्रों को जबरदस्ती ज्ञान की बातें न ठूसे, बल्कि छात्रों को आने वाले कल के चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार करे। वहीं वे अपने बेटे को पुजारी बनाना चाहते थे। उनका मानना था कि शिक्षा के माध्यम से ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किजा जा सकता है।

हालांकि विश्व में शिक्षक दिवस (Happy Teachers Day 2019) को 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। यूनेस्को ने शिक्षकों के कार्यों की सराहना के लिए 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है।

आइए जानते हैं सर्वपल्ली राधाकृष्णन की वो बातें जो आज भी प्रसांगिक हैं-

  • उम्र या युवावस्था का समय से लेना-देना नहीं है। आप अपने आप को कितना नौजवान या बूढा महसूस करते हैं यही मायने रखता है।
    सचमुच ऐसा कोई बुद्धिमान नहीं है जो स्वयं को दुनिया के कामकाज से अलग रख कर इसके संकट के प्रति असंवेदनशील रह सके।
  • शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है. अत:विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए।
  • किताब पढ़ना हमें चिंतन और सच्चे आनंद की आदत देता है। पुस्तकें वो साधन हैं जिनके जरिए हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।
  • ऐसा बोला जाता है कि एक साहित्यिक प्रतिभा, सबको समान दिखती है पर उसके समान कोई नहीं दिखता है।
  • शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें।
  • एक साहित्यिक प्रतिभा, कहा जाता है कि हर एक की तरह दिखती है, लेकिन उस जैसा कोई नहीं दिखता।
  • शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके।
  • The main function of a university is not to grant degrees and diplomas, but to develop the university spirit and advance learning. The former is impossible without corporate life, the latter without honours and post-graduate.
  • It is not God that is worshipped but the authority that claims to speak in His name. Sin becomes disobedience to authority not a violation of integrity.
  • The idea of Plato that philosophers must be the rulers and directors of society is practiced in India.

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