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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर सरकार ने कंसा शिकंजा, 108 सदस्य गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर शिकंजा कस दिया है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान उत्तर प्रदेश में हिंसा फैलाने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की अहम भूमिका सामने आने पर पीएफआइ के खिलाफ कार्रवाई की गई। यूपी पुलिस ने पीएफआई के 108 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने प्रेसवार्ता में बताया कि नागरिता सशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर व मेरठ में हिंसा के मामले में पुलिस बेहद सक्रिय है। इस मामले में लखनऊ, कानपुर, सीतापुर, मेरठ, गाजियाबाद व शामली में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सक्रिय सदस्यों की धरपकड़ शुरू की गई। पिछले चार दिनों में कानपुर सहित 13 अन्य जिलों से 108 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

कार्यवाहक डीजीपी श्री अवस्थी ने कहा कि अब पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 108 सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद अब इनके शीर्ष कार्यकर्ता पर शिकंजा कसने के लिए अन्य एजेंसी से भी लगातार बात चल रही है। प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन में पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद समेत पीएफआई के कोषाध्यक्ष और संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी और सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।

बता दें पिछले दिनों यूपी में सीएए के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में अभी भी पुलिस केंद्रीय एजेंसियों की मदद से उत्तर प्रदेश पीएफआई के फंडिंग नेटवर्क की जांच में लगी है। कार्यवाहक डीजीपी ने बताया कि 2001 में सिमी पर प्रतिबंध के बाद 2006 में पीएफआई केरल में बना। डीजीपी के मुताबिक पीएफआई का संगठन पूरे यूपी में है। उन्होंने कहा कि पीएफआई ने उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाई है।

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बता दें कि उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में पीएफआई बहुत अधिक सक्रिय है उनमें शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, लखनऊ, गोंडा, वाराणसी, बहराइच, सीतापुर, गाजियाबाद शामिल है। डीजीपी ने बताया कि अब तक की जांच में सामने आया है कि पीएफआई राष्ट्र विरोधी अभियान चला रहा है। सीएए के खिलाफ लोगों को भड़का कर हिंसक प्रदर्शन में पीएफआई की भूमिका सामने आई है।

पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष को हिंसा के मामले में जमानत के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि 19 तथा 20 दिसंबर के हिंसक प्रदर्शन की अभी जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में मजबूती से मामला लड़ा जाएगा। इस संगठन पर पुलिस की पैनी नजर है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने बताया कि बीते वर्ष साल दिसंबर में उत्तर प्रदेश में सीएए के विरोध में प्रदर्शन के मामले पीएफआई के 25 कार्यकर्ताओं को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अवस्थी ने कहा कि हम उनकी फंडिंग के बारे में जांच कर रहे हैं।

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Huntinews Hindi

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