लोगों की लापरवाही ने बढ़ाया कोरोना! फेल हो सकता है लॉकडाउन का मकसद

कोरोना संकट

भारत में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सरकार की तरफ से 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया। लेकिन जिस तरह से लोगों ने इस लॉकडाउन की धज्जियाँ उड़ाई उससे कोरोना वायरस कभी भी भारत में महामारी का रूप ले सकता है। गुरूवार तक कोरोना वायरस से 2000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। जिस तेज गति से कोरोना वायरस का प्रसार हो रहा है, उससे लगता है कि यदि यही हालात रहे तो सरकार के लिए इसे रोक माना नामुमकिन हो सकता है।

22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों का लॉकडाउन किया और लोगों से घरों में रहने की अपील की। कुछ लोगों ने इस अपील को माना तो कुछ इसकी धज्जियाँ उड़ाई। आज उसी का नजीता है कि देश में कोरोना के मामलों में बेहताशा वृद्धि हो रही है। लगातार बढ़ते मामले डरावनी स्थिति का अहसास करा रही हैं।

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दिल्ली, मुंबई, सहित कई बड़े महानगरों और मेट्रो सिटिज से लेकर बड़े शहरों में मकान मालिकों और छोटे व्यापारियों और कंपनियों ने जो संवदनहीनता दिखाई है, उसका फल अब देश भुगतेगा। लॉकडाउन के वाबजूद दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात में लोगों ने शामिल हो कर कोरोना वायरस के खिलाफ जंग का मजाक उड़ाया और देश में कोरोना वायरस के फैलने की राह को और आसान किया।

दिल्ली सरकार की संवेदनहीनता ने दिल्ली से दिहाड़ी मजदूरों को पलायन करने पर मजबूर किया और उत्तर प्रदेश सरकार की एक चूक ने कोरोना के प्रसार की संवेदनशीलता बढ़ा दिया है। राज्य सरकारें एक तरफ लोगों को हर संभव मदद का सिर्फ भरोसा देते रहे और मजदूर भूख से तरपते अपने घरों को पैदल जाने को मजबूर हुए।

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अब देश हालात इस कदर खराब हो चले हैं कि प्रधानमंत्री को आपात स्थिति में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करनी पड़ रही है। कोरोना से जंग के लिए 500 अतिरिक्त डॉक्टरों की भर्ती भी नाकाम हो जाएगी यदि इसी तरह से लोग लॉकडाउन का मजाक उड़ाते रहेंगे। जहां तक मुझे जानकारी है भारत में 58 लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है। लेकिन लोग हैं कि मानने को तैयार नहीं है। यदि इसी तरह से लॉकडाउन से मजाक चलता रहा तो भारत में इटली की तरह ही शमशान में तब्दील हो जाएगा।

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नोट- यह लेखक का निजी विचार है

✍ ‘हिमांशु कुमार’