महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन ने धोखे से अंगराज कर्ण का वध किया था

महाभारत को वो युद्ध तो आपको जरूर याद होगा, जिसमें भारत का सबसे युद्ध हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इससे भयंकर युद्ध इतिहास में कभी नहीं हुआ था। जान-माल की क्षति के साथ ही पृथ्वी के कई हिस्से बरबाद हो गए थे। इस युद्ध का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुरुक्षेत्र का वह धरती जहां पर यह युद्ध हुआ था, आज भी उस युद्ध की गवाही दे रहा है। आज भी कुरुक्षेत्र की धरती खून के भांति लाल है।

महाभारत का सबसे खौफनाक और भयंकर युद्ध अंगराज कर्ण और कुंति पुत्र अर्जुन के बीच हुआ था। कहा जाता है कि यह युद्ध कर्ण और अर्जुन के बीच का युद्ध नहीं, बल्कि भयंकर अस्त्र-शस्त्रों का युद्ध था। इसमें कई भयंकर शस्त्रों का प्रयोग किया गया था। ब्रम्हास्त्र से लेकर विष्णुआस्त्र तक।

 

लेकिन क्या आपको पता है कि अंगराज कर्ण को कोई मार नहीं सकता है। वह इतना शक्तिशाली था कि उसपर युद्ध में विजय पाना कठिन था। लेकिन अर्जन ने कर्ण का वध धोखे से किया था। युद्ध की नीति कहती है कि जब दुश्मन निहत्था हो तो उसपर वार नहीं करना चाहिए। लेकिन जब कर्ण के रथ का पहिया युद्ध के दौरान धरती में धंस गया था, तब अर्जन ने धोखे से कर्ण को मारा था।

जब कर्ण रथ से नीचे उतरकर रथ के पहिए का धंसा भाग निकालने की कोशिश कर रहा था, तब अर्जन ने अपने वाण को प्रयोग कर कर्ण को मृत्युगति दी थी।

 

देखिए कैसे अर्जन ने निहत्थे कर्ण का वध किया था

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