Basant Panchami : भारतीय संस्कृति में बसंत पंचमी का दिन अति महत्वपूर्ण है। बसंत पंचमी को विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत के महीने की पंचमी तिथि माँ सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन माता सरस्वती की पूजा का विधान है। सरस्वती माता को ज्ञान, कला और संगीत की देवी कहा जाता है।
कई बर्षों से चली आ रही परंपरा को लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। ऐसी मान्यता है कि माँ सरस्वती की पूजा से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है। इस साल 2020 में बसंत पंचमी 30 जनवरी को मनाया जा रहा है।
बसंत महीने की शुरुआत के साथ ही माँ सरस्वती की पूजा आरंभ होती है। Basant Panchami के दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। आज के दिन कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। इसलिए बसंत पंचमी के दिन भूलकर भी मनुष्यों को इन कार्यों को नहीं करना चाहिए।
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- पंचमी के दिन काले और लाल रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इस दिन पीले रंग का वस्त्र पहनें। पीले रंग के बस्त्र का पंचमी के दिन अधिक महत्व होता है।
- इस दिन मांस, मछली से दूर रहना चाहिए। शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए। भोजन करने से पहले तुलसी पत्ता का प्रसाद अवश्य ग्रहण करना चाहिए। तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत ही शुभ माना गया है।
- पंचमी की तिथि को पेड़-पौधों और फसलों को नहीं काटना चाहिए। इस बात विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बसंत पंचमी के दिन पेड़ों और फसलों को किसी भी प्रकार से नुकसान ना हो।
- बसंत पंचमी के दिन स्नान के बाद ही कोई भी कार्य करना चाहिए। सुबह सबसे पहले मनुष्यों को स्नान करना चाहिए। उसके बाद कोई कार्य और भोजन करना चाहिए।
- इस दिन अपनी वाणी पर संयम रखें। वाणी में हमेशा मधुरता बनाएँ रखें। किसी के ऊपर गुस्सा न करें। अनजानें में भी किसी का अपमान न करें और अपशब्द न बोलें।
Basant Panchami : माँ सरस्वती की पूजन विधि
सुबह सबसे पहले स्नान कर पूजा स्थल पर वाद्य यंत्र और किताबें रखनी चाहिए। उसके बाद माँ सरस्वती की वंदना करना चाहिए। पूजा स्थल पर बच्चों को अवश्य बैठाएँ। उसके बाद माँ सरस्वती को पीले और सफेद फूल और श्वेत चंदन अर्पित करें। माँ को हरे और पीले रंग के फल चढ़ाएँ। इसके बाद मूल मंत्र ऊँ ऐं सरस्वत्यै नम: का जाप हल्दी की माला से करें। इस दिन पीले चावल या फिर पीले रंग का ही भोजन करें।

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