बीएस-3, लोगों ने खुद की जान जोखिम में डाली

संतोष कुमार। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारत में 1 अप्रैल से बीएस-3 के वाहनों की बिक्री पर रोक लग गई है। 1 अप्रैल से बीएस-3 मानक के वाहनों को बेचना और पंजीकरण करने पर रोक लग गई है। इसी के मद्देनजर वाहन कंपनियों ने इन वाहनों पर भारी-भरकम डिस्काउंट देकर इसे अपने स्टॉक से निकालने की कोशिश की और आश्चर्यजनक रुप से वो इसमें सफल रहे। अब सवाल यह है कि क्या किसी कंपनी के लिए लोगों की जान से ज्यादा अपने वाहनों की बिक्री और मुनाफा ज्यादा मायने रखता है?

यहां सवाल सिर्फ कंपनियों के लिए ही नहीं है बल्कि सवाल लोगों से भी है कि क्या उनके लिए अपनी जान से ज्यादा कीमती 12 से 22 हजार रुपये का डिस्काउन्ट है। भले ही ये जहरीले वाहन उनकी और उनके आने वाली पीढ़ीयों की जिन्दगी 22 साल पहले ही खत्म कर दे। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में मई 2015 से 2017 तक एक भी दिन ऐसा दिल्ली के लोगों को नसीब नहीं हुई जो साफ हो। यानि पिछले दो सालों से दिल्ली के लोग जहरीले हवा को अपने फेंफड़ों में जमा कर रहे हैं।

दूसरी ओर वाहन बनाने वाली कंपनियों को ये पहले ही पता था कि 1 अप्रैल से बीएस-3 वाहनों की बिक्री और उत्पादन पर रोक है। लेकिन कंपनियों को भारतीय कानून से जरा भी डर नहीं लगता है। वो यहां के कानून को फोरगारेंटेड लेकर चलते है। उन्हें इस बात का पूरा यकीन होता है कि कोई न कोई साथी (पैरोकार) उसे इस झंझट से जरूर उबार लेगा। दो दिनों से जारी माहौल को देखकर आप कह सकते है कि भारत के लोगों के लिए क्या जरूरी है। साथ ही आप इस बात का भी भली-भांति अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे देश में किस प्रकार के लोगों की जमात खरी है।

यह भी ट्रेंड में है 😊👇

ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सेना की एक साहसिक कार्रवाई

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना का एक ऐसा अभियान था जिसे विशेष रूप से आतंकवादियों के…

May 21, 2025
आम बजट 2024- 25

आम बजट 2024- 25: बिहार पर फोकस, मुद्रा लोन की सीमा बढ़ी, शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए 1.48 लाख करोड़

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने MODI 3.0 सरकार का पहला आम बजट 2024-…

Jul 26, 2024
हो जीवन उद्गार प्रिय

हो जीवन उद्गार प्रिय

इंद्रधनुषी सतरंगीझिलमिल हो नभ पंथकनक थाल में मेघ सजा होहो जीवन उद्गार प्रिय। सुरमई शामआँगन…

Apr 3, 2024

सवाल यह भी है कि क्या जो लोग वाहन को डिस्काउन्ट पर खरीदने के लिए लाइन में खड़े थे उनके पास कोई मजबूरी थी? क्या इन लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब नहीं रो रही थी? बिलकुल नहीं। ये वो लोग थे जिनके पास इतना पैसा था कि वो अराम से बीएस-4 मानक के वाहन भी खरीद सकते थे। लेकिन थोड़ी सी लालच में इन तथाकथित समझदार और पढे-लिखे लोगों ने ये साबित कर दिया कि यहां के लोगों की सोच और मानसिकता कैसी है। भारत में लोगों और कंपनियों को कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे पर्यावरण गंदा हो या फिर लोगों की जान चली जाय। उन्हें तो बस अपने जेब की पड़ी है। लेकिन इस डिस्काउन्ट के चक्कर में लोग भूल गए कि उसे भी इसी हवा में रहना है। उनके पैर भी इसी जमीन पर पड़ेंगे।


Follow us on Google News

देश और दुनियाँ की ताजा खबरों के लिए बने रहें हमारे साथ। लेटेस्ट न्यूज के लिए Huntnews.Com के होमपेज पर जाएं। आप हमें फेसबुक, पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब कर सकते हैं।

Picture of Huntinews

Huntinews