नई दिल्ली। भारत में धूमकेतु सी/2020 एफ-3 जिसे नियोवाइज के नाम से भी जाना जाता है वह भारत में 14 जुलाई से दिखाई देगा। यह धूमकेतु भारत में लगातार 20 दिनों तक आसमान में दिखाई देगा।
भुवनेश्वर के पठानी सामंत तारामंडल के उप निदेशक के अनुसार, इस धूमकेतु को भारत में लोग नंगी आँखों से देख सकेंगे। यह धूमकेतु अगले 20 दिनों तक सूर्यास्त के बाद 20 मिनट तक के लिए दिखाई देगा।
3 जुलाई को यह धूमकेतु सूर्य के सबसे निकट पहुंचा था। सामंत तारामंडल के अनुसार, 22 जुलाई को यह धूमकेतु पृथ्वी के सबसे निकट 10.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर होगा। शुरुआत में यह शाम के वक्त दिखेगा। धीरे-धीरे इसे रात में लंबे समय तक देखा जा सकेगा।
डॉक्टर शुभेंदु पटनायक के अनुसार, यह धूमकेतु 14 जुलाई को शाम में नजर आएगा। शाम के समय इसे दूरबीन की मदद से आसानी से देखा जा सकता है। शाम के समय यह धूमकेतु आसमान में धीरे-धीरे ऊपर चढ़ेगा और लंबे वक्त के लिए दिखाई देगा। 30 जुलाई को इसे सप्तऋषि तारामंडल के पास देखा जाएगा।
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बता दें कि ऐसा अवसर 23 साल बाद आ रहा है जब यह धूमकेतु दिखाई दे रहा है। इससे पहले 1997 में अंतिम बार हेल वफ धूमकेतु को नंगी आँखों से देखा गया था। सूर्यास्त के बाद इस धूमकेतु के 25 से 30 मिनट तक उत्तर-पश्चिम दिशा में देखा जा सकता है।
धूमकेतु क्या है और कहां से आता है?
धूमकेतु एक विशाला तारा होता है। हमारे सौरमंडल में लाखों की संख्या में धूमकेतु सूर्य के चक्कर लगा रहे हैं। हाली नामक धूमकेतु 76 साल के अंतराल पर दिखाई देता है। यह धूमकेतु अब 2061 में दिखाई देगा। धूमकेतु कुछ किलोमीटर व्यास के पत्थर, बर्फ एवं धूल का एक कठोर पिंड होता है। यह अत्यंत ठंडी अवस्था में सूर्य के पास से चक्कर लगाता है।

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