Highlights:
- मकर संक्रांति पर पतंगबाजी सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी और नई ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
- इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, जो त्योहार को खास बना देता है।
- तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मिठाइयों के साथ पतंगबाजी का आनंद दोगुना हो जाता है।
Highlights:
- मकर संक्रांति पर पतंगबाजी सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी और नई ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
- इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, जो त्योहार को खास बना देता है।
- तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मिठाइयों के साथ पतंगबाजी का आनंद दोगुना हो जाता है।
हिंदू धर्म में बर्षों से मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु अपनी भक्ति भाव से भगवान भास्कर यानी सूर्य की उपासना करते हैं। इस दिन उत्तर-पूर्वी भारत में खासतौर से दही और चूरा खाने का रिवाज है। मकर संक्रांति के दिन तिल का बना हुआ पकवान का भोग लगाया जाता है और खाया भी जाता है। मकर संक्रांति के दिन पतंग भी उड़ाया जाता है।
भारत के अधिकांश हिस्सों में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन पतंगबाजी की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पतंग उड़ाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण भी हैं। आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति पर पतंगबाजी क्यों की जाती है और इसके क्या कारण हैं?
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी क्यों की जाती है?
मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन सूर्य उत्तरायण का होने लगता है। इस कारण इस समय सूर्य की किरणें व्यक्ति के लिए औषधि का काम करती हैं। धूप में खड़े होकर पतंग उड़ाने से शरीर में कफ की मात्रा कम होती है। त्वजा का रुखापन भी दूर हो जाता है।
सूर्य की किरणों में विटामिन-डी होता है। पतंग उड़ाते समय व्यक्ति के शरीर पर सूर्य की किरणें सीधे संपर्क में आती हैं। इससे शरीर से जुड़ी कई समस्याओं से निजात मिलती है। विटामिन-डी मिलने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और यह शरीर के लिए जीवनदायिनी शक्ति की तरह काम करता है।
जब सूर्य उत्तरायण हो जाता है तो उनकी गर्मी में शीत का प्रकोप और शीत के कारण होने वाले रोगों को समाप्त करने की क्षमता होती है। ऐसे में धूप में पतंग उड़ाने से सूर्य की करणें एक औषधि की तरह काम करती हैं।
दिमाग रहता है हमेशा सक्रिय
Makar Sankranti के दिन पतंग उड़ाने से हाथ और गर्दन की मांसपेशियों में लचीलापन आता है। इस समय दिमाग हमेशा सक्रिय रहता है ताकि कोई उनका पतंग काट न दे। पतंग उड़ाते समय मन-मस्तिष्क प्रसन्न रहता है। इससे शरीर में गुड हार्मोंस का स्तर बढ़ता है। पतंग उड़ाते समय आंखों की भी एक्सरसाइज होती है।

मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का धार्मिक कारण
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी करना लोगों को काफी पसंद आता है। इसके कुछ धार्मिक कारण भी हैं। तमिल रामायण के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन भगवान राम ने पतंग उड़ाई थी। यह पतंग इंद्रलोक तक पहुंच गई थी। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और मकर संक्रांति के अवसर पर हर साल पतंगबाजी की जाती है।
पतंग को आत्मा का परमात्मा से जुड़ने का संकेत माना जाता है। यह आत्मज्ञान की यात्रा का प्रतीक भी है। इसके अलावा कुछ मान्यताओं में पतंग उड़ाना धरती और आकाश के बीच एक संचार का माध्यम माना जाता है। इससे मृतक आत्माओं को स्वर्ग पहुंचने में मदद मिलती है।
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मकर संक्रांति पतंगबाजी से जुड़े प्रश्न
माना जाता है कि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और पतंगबाजी खुशी, सकारात्मक ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक है।
हां, धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन शुभ होता है और पतंग उड़ाना उत्सव का हिस्सा है।
नायलॉन या चाइनीज मांझे से बचें, सुरक्षित स्थान चुनें और बच्चों की निगरानी करें।
तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, तिल की मिठाइयां और गुड़ से बने पकवान खास होते हैं।
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पतंगबाजी का खास चलन है।

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