तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद एनकाउंटर के बाद एनकाउंटर की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है। बता दें कि सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता दिशा के चार आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। हालांकि बाद में इस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे थे। जिसके बाद तेलंगाना सरकार ने इस एनकाउंटर की जांच के आदेश दिए हैं।
क्राइम की रिकंस्ट्रक्ट के दौरान पुलिस ने किया एनकाउंटर
शुक्रवार को हैदराबाद के एनएच 44 पर पुलिस ने फिर से क्राइम की रिकंस्ट्रक्ट करने के लिए आरोपियों को ले गई थी। बताया गया है कि वहां पर अपराधियों ने पुलिस से हथियार छीन लिए और पुलिस पर गोलीबारी करने लगे। पुलिस ने अरोपियों को गोलीबारी छोड़ कर आत्मसमर्पण करने को कहा। लेकिन अरोपियों ने पुलिस पर लगातार गोलियां चलानी जारी रखी। जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में सभी आरोपियों को मार गिराया।
मुठभेड़ के दौरान पुलिस के दो जवान भी घायल हुए। घायल जवान को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। हैदराबाद में हुए इस एनकाउंटर के बाद सवाल उठने शुरू हो गए। लगातार सवाल उठने के बाद तेलंगाना सरकार ने एसआईटी की गठन किया और इस एनकाउंटर के जांच के आदेश दिए है। बता दें कि हैदराबाद में एक पशु चित्किसक की गैंगरेप के बाद जलाकर हत्या कर दी गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट के जज ने बताया ‘तालिबानी न्याय’
वहीं इस एनकाउंटर को दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज ने ‘तालिबानी न्याय’ बताया है। जस्टिस आरएस सोढ़ी ने कहा कि आरोपियों को सुरक्षित रखना पुलिस का कर्तव्य है, देश में तालिबानी न्याय के लिए कोई जगह नहीं है। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रविवार को लगातार दूसरे दिन हैदराबाद एनकाउंटर की जांच जारी रखी।
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पुलिस की इस कार्रवाई पर एक ओर जहां पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और बाबा रामदेव ने इसका समर्थन किया तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सांसद शशि थरूर, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इसे समाज के लिए अस्वीकार्य बताया।

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