मतदाता पहचान पत्र नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण, अदालत ने दो को बरी किया

मतदाता पहचान पत्र

मुंबई। मुंबई में अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने हाल ही में मुंबई पुलिस द्वारा बांग्लादेश से यहां घुसपैठ करने के आरोप में पकड़े गए दो लोगों को बरी कर दिया। अवैध घुसपैठ के मामले में न्यायालय ने माना कि एक निर्वाचन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण है, क्योंकि किसी व्यक्ति को जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रपत्र 6 के मद्देनजर संबंधित प्राधिकारी के समक्ष घोषणा पत्र दाखिल करना होता है कि वह भारत का नागरिक है और यदि घोषणा मिथ्या पाई जाती है तो उस व्यक्ति को दंड मिलना चाहिए।

Join Whatsapp Group Join Now
Join Telegram Group Join Now

एसीएमएम एएच काशीकर ने अब्बास शेख और उनकी पत्नी राबिया खातून साहिख को बरी कर दिया, जिन्हें पासपोर्ट नियम 3 और नियम 6 (भारत में प्रवेश) 1950, विदेशी नियम 1948 के पैरा 3 (1) जो विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत दंडनीय है, की शर्तों के उल्लंघन के लिए आरोपी बनाया गया था।

यह भी पढ़ें -   मराठा आरक्षण आंदोलन : हिंसा के बाद मराठा क्रांति मोर्चा ने बंद वापस लिया

कोर्ट ने इस मामले से दंपति को बरी करते हुए कहा, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और पासपोर्ट को मूल प्रमाण के तौर पर माना जा सकता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मतदाता पहचान पत्र को भी नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण कहा जा सकता है। मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए जन प्रतिनिधि अधिनियम के फार्म 6 के तहत किसी भी व्यक्ति को प्राधिकरण के समक्ष नागरिक के तौर पर घोषणा पत्र दाखिल करना होता है कि वह भारत का नागरिक है। यदि घोषणा गलत पायी जाती है तो अमुक शख्स सजा के लिए उत्तरदायी होता है।

यह भी पढ़ें -   बांग्लादेश में अफवाह के चलते कई हिंदू समुदाय के घरों में लूटपाट, लगाई आग

अदालत ने कहा कि अब्बास शेख (45) और राबिया खातून शेख (40) ने अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य मूल दस्तावेज भी पेश किए थे। हालांकि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि दंपति की ओर से पेश किए गए सभी दस्तावेज झूठे हैं।

कोर्ट में अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि दंपति के पास मौजूद दस्तावेज फर्जी हैं। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष इस बात को साबित करने में विफल रहा है कि आरोपी द्वारा पेश दस्तावेज वास्तविक नहीं हैं।

यह भी पढ़ें -   इस दिग्गज नेता ने छोड़ा राजद का साथ, हुए जदयू में शामिल

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड किसी व्यक्ति की नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ नहीं माने जा सकते, क्योंकि उक्त दस्तावेज़ नागरिकता साबित करने के उद्देश्य से नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और पासपोर्ट आदि दस्तावेज़ों पर किसी भी व्यक्ति के मूल को स्थापित करने के लिए भरोसा किया जा सकता है।

Join Whatsapp Group Join Now
Join Telegram Group Join Now

Follow us on Google News

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए बने रहें हमारे साथ। लेटेस्ट न्यूज के लिए हन्ट आई न्यूज के होमपेज पर जाएं। आप हमें फेसबुक, पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब कर सकते हैं।