हरतालिका तीज 2025: इस समय बन रहा है शुभ योग, जानें कब करें पूजन और क्या है महत्व

हरतालिका तीज का त्योहार केवल व्रत और पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती और वैवाहिक जीवन की खुशियों का प्रतीक भी है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती से अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
हरतालिका तीज 2025: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Highlights:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 से 05:12 बजे तक
  • प्रातःकाल पूजा का समय: 05:56 से 08:31 बजे तक
  • राहुकाल: दोपहर 03:36 से शाम 05:13 बजे तक

Highlights:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 से 05:12 बजे तक
  • प्रातःकाल पूजा का समय: 05:56 से 08:31 बजे तक
  • राहुकाल: दोपहर 03:36 से शाम 05:13 बजे तक

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज 26 अगस्त, मंगलवार को है। हिंदू धर्म में यह व्रत खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विधि-विधान से की जाती है। खास बात यह है कि इस साल तीज पर रवि योग, साध्य योग और शुभ योग का संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

हरतालिका तीज 2025 पर शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 27 मिनट से 05 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। प्रातःकाल पूजन का शुभ समय सुबह 05:56 बजे से 08:31 बजे तक रहेगा। इस समयावधि में पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

शाम को प्रदोष काल का पूजन मुहूर्त शाम 06:49 बजे से 07:11 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दिन के अन्य शुभ समय इस प्रकार हैं:

  • अभिजित मुहूर्त: 11:57 एएम से 12:48 पीएम
  • विजय मुहूर्त: 02:31 पीएम से 03:23 पीएम
  • सायाह्न संध्या: 06:49 पीएम से 07:56 पीएम

ध्यान रहे कि राहुकाल के समय पूजा-पाठ या शुभ कार्य करना शुभ नहीं माना जाता। इस बार राहुकाल दोपहर 03:36 बजे से शाम 05:13 बजे तक रहेगा।

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हरतालिका तीज की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने जंगल में जाकर निर्जल व्रत किया और घोर तप साधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इस दिन को ही हरतालिका तीज के रूप में मनाया जाता है।

मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने अपनी सखियों की मदद से शिव जी की मूर्ति बनाकर उनका पूजन किया था। तभी से इस व्रत को विशेष रूप से महिलाएं करती आ रही हैं। यह व्रत न सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाता है बल्कि अविवाहित कन्याओं के लिए भी मनचाहे वर की प्राप्ति का मार्ग खोलता है।


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Kumari Sulekha

कुमारी सुलेखा एक अनुभवी लेखिका हैं। वह मुख्य रूप से धार्मिक विचारों, भारतीय संस्कृति, जीवनशैली और वास्तु शास्त्र पर लेखन करती हैं। इस क्षेत्र में कुमारी सुलेखा को 4 साल का अनुभव प्राप्त है।

हरतालिका तीज 2025: इस समय बन रहा है शुभ योग, जानें कब करें पूजन और क्या है महत्व

हरतालिका तीज का त्योहार केवल व्रत और पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती और वैवाहिक जीवन की खुशियों का प्रतीक भी है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती से अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
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