अखंड साम्राज्य योग: जानिए कैसे बनता है यह योग और क्या हैं इसके चमत्कारी फल

अखंड साम्राज्य योग कैसे बनता है? ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के विशेष संयोगों को राजयोग कहा जाता है। इन्हीं दुर्लभ और शक्तिशाली योगों में से एक है 'अखंड साम्राज्य योग'।
अखंड साम्राज्य योग

Highlights:

  • गुरु और चंद्रमा की गुप्त चाल से बनता है इतना शक्तिशाली योग।
  • इस योग को माना जाता है सभी राजयोगों में सर्वोच्च।
  • इस योग वाला व्यक्ति जीवन में कभी गरीबी का मुंह नहीं देखता।

Highlights:

  • गुरु और चंद्रमा की गुप्त चाल से बनता है इतना शक्तिशाली योग।
  • इस योग को माना जाता है सभी राजयोगों में सर्वोच्च।
  • इस योग वाला व्यक्ति जीवन में कभी गरीबी का मुंह नहीं देखता।

अखंड साम्राज्य योग कैसे बनता है? ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के विशेष संयोगों को राजयोग कहा जाता है। इन्हीं दुर्लभ और शक्तिशाली योगों में से एक है ‘अखंड साम्राज्य योग’। इस योग को ऐश्वर्य और स्थायी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह योग जातक के जीवन से दरिद्रता को सदा के लिए दूर कर देता है और उसे उच्चतम सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाता है।

कैसे बनता है यह दुर्लभ संयोग?

यह योग हर किसी की कुंडली में नहीं बनता। इसके निर्माण के लिए कुछ खास ग्रहीय शर्तों का पूरा होना जरूरी है। सबसे पहले तो जातक का लग्न स्थिर होना चाहिए यानी वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि लग्न में से कोई एक। दूसरी महत्वपूर्ण शर्त गुरु यानी बृहस्पति की स्थिति से जुड़ी है। गुरु को कुंडली के दूसरे, पांचवें या ग्यारहवें भाव का स्वामी होना चाहिए। प्रत्येक स्थिर लग्न के लिए गुरु का कारक भाव अलग-अलग निर्धारित है।

गुरु और चंद्रमा का है विशेष महत्व

अखंड साम्राज्य योग के पूर्ण रूप से बनने के लिए गुरु और चंद्रमा की स्थिति निर्णायक मानी गई है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर कुंडली के दूसरे, नौवें या ग्यारहवें भाव में बलवान गुरु और शुभ चंद्रमा साथ स्थित हों तो यह योग पूरी शक्ति के साथ बनता है। एक अन्य महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि कुंडली के दूसरे, दशम और ग्यारहवें भाव के स्वामी एक साथ केंद्र के भावों में स्थित हों। इन सभी शर्तों के पूरे होने पर ही इस दुर्लभ योग की उत्पत्ति होती है।

इस योग के क्या हैं विशेष लाभ?

इस योग के प्रभाव को अद्भुत और व्यापक माना गया है। ऐसा जातक जीवन में कभी भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करता। उसे पैतृक संपत्ति का भरपूर लाभ मिलता है और वह उसका एकमात्र स्वामी बनता है। हर प्रकार के व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में उसे सफलता प्राप्त होती है। जीवन की सभी भौतिक सुख-सुविधाएं उसे सहज रूप से प्राप्त होती रहती हैं।

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भावानुसार बदलते हैं फल

इस योग का प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि यह किस भाव में बना है। अगर यह योग दूसरे भाव में बने तो जातक को शेयर बाजार और निवेश से विशेष लाभ मिलता है। पांचवें भाव में बना योग उच्च शिक्षा और संतान के भाग्य को चमकाता है। ग्यारहवें भाव में बना योग हर प्रकार के उद्यम और व्यापार में सफलता दिलाता है जबकि नौवें भाव में बना योग आध्यात्मिक उन्नति और अलौकिक शक्तियां प्रदान करने वाला माना जाता है।


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Ratna Priya

रत्ना प्रिया पिछले 6 वर्षों से डिजिटल मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं। वह मुख्य रुप से राजनीति, समाज, जेंडर, जीवनशैली, धर्म और संस्कृति जैसे विषयों पर लेखन करती हैं।

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