नई दिल्ली। जब भी देश में आजादी का नाम आता है तब-तब भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव जैसे शहीदों को देश के लिए अपने प्राणों की आहुति कैसे हंसते-हंसते दे गए, याद किया जाता है। भारत के वीर स्वतंत्रता सेनानी भगत सिह का जन्म पंजाब प्रांत में लायपुर जिले के बंगा में 28 सितंबर, 1907 को हुआ था। शहीद भगत सिंह के पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था।
जिस पंजाब प्रांत में शहीद भगत सिंह का जन्म हुआ वो अब पाकिस्तान में है। एक ऐसे क्रांतिकारी जो 12 साल की उम्र में जलियांवाला बाग हत्याकांड के साक्षी रहे और यहीं से उनके दिल में आजादी की ज्वाला भड़की। जलियांवाला बाग हत्याकांड का भगत सिंह की सोच पर ऐसा असर पड़ा कि उन्होंने पढ़ने-लिखने और खेलने-कूदने की उम्र में लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर भारत की आजादी के लिए ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना कर डाली।
वीर सेनानी भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह आज हर भारतीय नौजवान के लिए बहुत बड़ा आदर्श हैं। शहीद भगत सिंह का ‘इंकलाब जिंदाबाद’ नारा आज भी हर भारतीयों के अंदर जोश पैदा करती है। इस नारे का प्रयोग शहीद भगत सिंह हर भाषण और लेख में किया करते थे।
आजादी के इस मतवाले ने पहले लाहौर में ‘सांडर्स-वध’ और उसके बाद दिल्ली की सेंट्रल असेम्बली में चंद्रशेखर आजाद और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट कर ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह की चुनौती दी। 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेम्बली में पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्प्यूट बिल पेश हुआ।
भगत सिंह को मजदूरों के प्रति शोषण की नीति पसंद नहीं आती थी इसलिए अंग्रेजी हुकूमत को अपनी आवाज सुनाने और अंग्रेजों की नीतियों के प्रति विरोध प्रदर्शन के लिए भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली में बम फोड़कर अपनी बात सरकार के सामने रखी। दोनों चाहते तो भाग सकते थे, लेकिन भारत के निडर पुत्रों ने हंसत-हंसते आत्मसमर्पण कर दिया।
यह भी ट्रेंड में है 😊👇

Vande Bharat Train Owner: वंदे भारत ट्रेन का मालिक कौन? जानिए क्यों रेलवे देती है हर साल करोड़ों का किराया
Vande Bharat Train Owner: क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चमकदार वंदे भारत ट्रेन…

नई टोल टैक्स योजना क्या है, कैसे आपको मिलेगा 3000 रुपये में एक साल का पास? जानें 5 बड़ी बातें
New Toll Tax Policy in India: 15 अगस्त से पूरे देश में नई टोल टैक्स…

Driving License बनाना चाहते हैं तो जान लें यह Online Process, चुटकियों में बनेगा लाइसेंस
Driving License Online Process: क्या आप भी चाहते हैं ड्राइविंग लाइसेंस बनाना। लेकिन किसी वजह…
दो साल की सजा काटने के बाद शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को लाहौर षड्यंत्र केस में एक साथ फांसी की सजा हुई और 24 मई 1931 को फाँसी देने की तारीख तय हुई। लेकिन तय की गई तारीख से 11 घंटे पहले ही 23 मार्च 1931 को शाम साढ़े सात बजे फाँसी दे दी गई। कहा जाता है कि जब उनको फाँसी दी गई तब वहां कोई मजिस्ट्रेट मौजूद नहीं था, जबकि नियमों के मुताबिक ऐसा होना चाहिए था।23 मार्च 1931 का वो दिन जब उन तीनों देशभक्तों ने हसंते-हसंते लाहौर जेल में बलिदान दे दिया।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को आज के ही दिन फांसी दी गई थी। जिस दिन भगत सिंह और बाकी शहीदों को फांसी दी गई थी, फांसी दिए जाने से पहले शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव से उनकी आखिरी ख्वाहिश पूछी गई। तीनों ने एक स्वर में कहा कि हम आपस में गले मिलना चाहते हैं। उस दिन लाहौर जेल में बंद सभी कैदियों की आँखे नम हो गई थी। भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का देश प्रेम आज भी हर भारतीय के दिल में अमर है, और आगे भी रहेगा… इंकलाब जिंदाबाद…

देश और दुनियाँ की ताजा खबरों के लिए बने रहें हमारे साथ। लेटेस्ट न्यूज के लिए Huntnews.Com के होमपेज पर जाएं। आप हमें फेसबुक, पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब कर सकते हैं।

































