शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से कई प्रकार के लाभ होते हैं। सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा सदैव बनी रहती है। व्यक्ति को कभी भी डर और भय नहीं सताता है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति सुंदरकांड का पाठ नियमित रूप से करता है उनकी रक्षा हमेशा हनुमान जी खुद करते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि शनिवार को शनिदेव के अलावा हनुमान जी की पूजा करने से जीवन में और घर में बरकत आती है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सुंदरकांड का पाठ करना बहुत ही उत्तम माना जाता है। सुंदरकांड का पाठ करने वाले भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई राम चरित्र मानस के 7 अध्याय में से पांचवा अध्याय सुंदरकांड का है। इसमें हनुमान जी के बारे में विशेष रूप से चर्चा की गई है। सुंदरकांड का महत्व शनिवार और मंगलवार को बहुत ही अधिक बताया गया है।
सुंदरकांड का महत्व
सुंदरकांड में हनुमान जी के गुणों को और उनकी महिमा को दर्शाया गया है। इसमें भगवान राम के गुणों का नहीं बल्कि उनके भक्त हनुमान जी के गुणों और उनके विजय के बारे में बताया गया है। इसलिए सुंदरकांड का महत्व बहुत ही अधिक हो जाता है। यह मुख्य रूप से हनुमानजी को पूर्ण रूप से समर्पित है।
सुंदरकांड का पाठ करने के लाभ
सुंदरकांड का पाठ करने वाले भक्तों को हनुमान जी बल प्रदान करते हैं और ऐसे लोगों के आसपास नकारात्मक शक्तियां कभी भी नहीं आती हैं। ऐसा माना जाता है कि जब भक्तों का आत्मविश्वास कम हो जाता है और जीवन में कोई काम नहीं बनता है तो सुंदरकांड का पाठ करने से सभी प्रकार के काम अपने आप बनने लगते हैं।
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शनि महादशा में सुंदरकांड का लाभ
यदि शनि की महादशा चल रही हो तो सुंदरकांड का पाठ करने से इसमें भी लाभ मिलता है। शनिदेव खुद हनुमानजी के भक्त हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन जातकों पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती चल रहा हो, उन्हें रोजाना सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से शनि की महादशा का प्रभाव कम होता है और बुरे दिनों में भी जीवन में अत्यधिक बुरा होने से बच जाते हैं।
विद्यार्थियों के लिए सुंदरकांड पाठ के लाभ
विद्यार्थियों को भी सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें यह सफलता के और करीब ले जाता है। यदि आप सुंदरकांड का पाठ करने के साथ-साथ उनकी पंक्तियों का अर्थ भी समझते हैं तो इससे और भी ज्यादा लाभ मिलता है। ऐसा माना जाता है कि यदि आप संपूर्ण रामचरित्रमानस का पाठ नहीं कर पाते हैं तो कम से कम सुंदरकांड का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे जीवन में विशेष लाभ मिलता है।
अस्वीकरण – यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इस विषय में विशेष जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से ही हमेशा संपर्क करें।

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