नई दिल्ली। Yes Bank Crisis – देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल यस बैंक पर आरबीआई के नियंत्रण के बाद शुक्रवार शाम को केंद्रीय बैंक ने इसका रिकंस्ट्रक्शन प्लान का ऐलान किया है। इतनी जल्दी लिए गए फैसलों से लगता है कि बैंक के प्रबंधन को निरस्त करने और इसके कामकाज पर अस्थाई रूप से रोक लाने से पहले सरकार ने पूरी तरह से तैयारी कर ली थी।
फिलहाल डूबते यस बैंक को देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई से सहारा मिल सकता है। आरबीआई की स्कीम के मुताबिक, देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई यस बैंक में निवेश करेगा और अपनी हिस्सेदारी 49 फीसदी रखेगा। हालांकि निवेशक बैंक को 3 साल के भीतर अपनी हिस्सेदारी 49 से घटाकर 26 फीसदी पर लाना होगा।
यस बैंक रिकंस्ट्रक्शन स्कीम में यह भी जिक्र किया गया है कि निवेशक बैंक अपने 26 फीसदी हिस्सेदारी को कम नहीं कर सकता। यानि निवेशक बैंक के यस बैंक में 26 फीसदी हिस्सेदानी अपने पास रखनी होगी।
आरबाीआई ने यस बैंक लिमिटेड रिकंस्ट्रक्शन स्कीम 2020 के नाम से योजना का मसौदा तैयार किया है, जिसमें कहा गया है कि बैंकिंग नियमन कानून 1949 की धारा 45 के तहत इस स्कीम को तैयार किया गया है। खबर है कि एसबीआई यस बैंक में 49 फीसदी की हिस्सेदारी लेने में अपने साथ दूसरे वित्तीय संस्थानों की मदद भी ले सकता है।
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स्कीम के तहत नए यस बैंक के निदेशक बोर्ड में कुल छह सदस्य होंगे। इसमें एक सीईओ व एमडी, नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन, दो नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और दो सदस्य निवेशक बैंक की तरफ से होंगे।
शुक्रवार शाम को आरबीआई की इस घोषणा के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पुनर्गठित होने के बाद यस बैंक की पहले जो परिसंपत्तियां और दायित्व चल रही हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वह सभी पहले की तरह ही काम करती रहेंगी। बता दें कि Yes Bank Crisis के बाद ग्राहकों के मन में अनिश्चितता का माहौल है। लोग अपने खातों से पैसा निकालने के लिए एटीएम और बैंक के बाहर लाइन में खड़े हैं।

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