पीपल पेड़ में लक्ष्मी का वास कब होता है? जानें कब करें पूजा

पीपल पेड़ में लक्ष्मी का वास कब होता है?

पीपल के पेड़ में लक्ष्मी का वास कब होता है? शास्त्रों के अनुसार, पीपल के पेड़ में मां लक्ष्मी का वास दिन के समय होता है। वहीं रविवार के दिन पीपल में किसी भी देवी देवता का वास नहीं होता। इसलिए रविवार के दिन पीपल के वृक्ष पर दिन और रात दोनों समय लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी का वास होता है। पीपल के वृक्ष में रात के समय प्रत्येक दिन लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी का वास होता है।

दिन के समय पीपल वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति आती है। लेकिन रात के समय पीपल के वृक्ष की पूजा करने के लिए मना किया जाता है। इसके अलावा रविवार के दिन और रात दोनों समय पीपल के वृक्ष की पूजा नहीं करनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि पीपल वृक्ष का संबंध शनिदेव से माना गया है और रविवार का दिन भगवान भास्कर का दिन होता है।

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रविवार का दिन भगवान भास्कर का होने के कारण और शनि देव भगवान सूर्य के पुत्र हैं लेकिन फिर भी दोनों के बीच तालमेल अच्छा नहीं होता है, इसलिए रविवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा नहीं करनी चाहिए। पढ़ें- घर में चाहते हैं माँ लक्ष्मी का वास तो शुक्रवार को भूलकर भी न करें यह काम

सूर्यास्त के बाद भूलकर भी ना करें पीपल वृक्ष की पूजा

कहा जाता है कि पीपल के पेड़ की पूजा दिन में ही करनी चाहिए। शाम ढलने के बाद और सूर्यास्त के बाद रात में पीपल की पूजा करना शुभ नहीं माना जाता है। यहां तक कि रात के समय पीपल के वृक्ष के नीचे जाना भी अशुभ माना जाता है। इसके पीछे का तर्क यह है कि रात के समय पीपल के वृक्ष पर अलक्ष्मी का वास होता है और जब कोई व्यक्ति रात के समय पीपल के पेड़ के पास जाता है तो उसके ऊपर अलक्ष्मी का प्रभाव बढ़ जाता है।

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हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो उनका कहना है कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। पीपल का वृक्ष दिन के समय ऑक्सीजन छोड़ता है और शाम के समय सबसे ज्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड गैस छोड़ता है। इसलिए शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे जाने से मना किया जाता है।

पूजा के वक्त पीपल के पत्तों को देखना चाहिए या नहीं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के पेड़ की पूजा करते समय या पीपल के सामने दीपक जलाते समय कभी भी ऊपर की ओर नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे का कारण यह बताया गया है कि पीपल का तना और जड़ों में दैवीय शक्ति का वास होता है। लेकिन दूसरी तरफ पीपल पेड़ के ऊपरी हिस्सों में आसुरी शक्तियों का वास होता है। इसलिए पूजा करते समय पीपल के पेड़ के ऊपर पत्तियों के तरफ नहीं देखना चाहिए।

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रविवार को पीपल का पेड़ काटना होता है मना

रविवार के दिन पीपल का पेड़ काटना अशुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के पेड़ में सभी देवी देवताओं का वास होता है। लेकिन यदि फिर भी पीपल के पेड़ को काटना पड़े तो रविवार के दिन में इसे कभी नहीं काटना चाहिए। पीपल का पेड़ काटने से पहले पीपल देवता से माफी मांग लेना चाहिए। ऐसा करने से देवी देवता रूस्ट नहीं होते हैं और पीपल का पेड़ काटने का कोई दुष्प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर नहीं पड़ता है।

अस्वीकरण- यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा विशेषज्ञ से संपर्क करें। लेटेस्ट खबरों के लिए हमारे होम पेज पर विजिट करें


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