Highlights:
- 24 साल बाद सावन शिवरात्रि पर बन रहे गजकेसरी योग
- चतुर्दशी तिथि के साथ भद्रा भी रहेगी, पूजा में कोई बाधा नहीं
- सुबह 4:40 बजे से जलाभिषेक की शुरुआत
Highlights:
- 24 साल बाद सावन शिवरात्रि पर बन रहे गजकेसरी योग
- चतुर्दशी तिथि के साथ भद्रा भी रहेगी, पूजा में कोई बाधा नहीं
- सुबह 4:40 बजे से जलाभिषेक की शुरुआत
सावन शिवरात्रि 2025 इस बार खास है क्योंकि 24 साल बाद कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं। सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि 23 जुलाई 2025 को पड़ रही है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक और चार प्रहर में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि व्रत और पूजा करने से मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं और विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार गजकेसरी, बुधादित्य, मालव्यराज, लक्ष्मी नारायण और सर्वार्थ सिद्धि जैसे शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों में की गई पूजा से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सुबह 4:40 बजे से जलाभिषेक की शुरुआत होगी।
भद्रा का साया भी रहेगा
चतुर्दशी तिथि के साथ भद्रा काल भी रहेगा जो दोपहर 3:30 बजे तक चलेगा। हालांकि भद्रा मिथुन राशि और स्वर्ग लोक में होने के कारण पूजा या जलाभिषेक में कोई बाधा नहीं होगी। भक्त पूरे दिन और रात भर भोलेनाथ की आराधना कर सकेंगे।
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चार प्रहर के शिव पूजा मुहूर्त
- प्रथम प्रहर: सुबह 7:25 से 10:05 बजे तक
- द्वितीय प्रहर: दोपहर 12:45 से 3:25 बजे तक
- तृतीय प्रहर: शाम 3:25 से 6:05 बजे तक
- चतुर्थ प्रहर: रात 10:05 से 12:45 बजे तक
इन मुहूर्तों में शिवलिंग का जलाभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भक्तों से सलाह दी गई है कि वे श्रद्धा और नियम से पूजा करें।

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