Highlights:
- गंगा का जलस्तर 24 घंटे में 1.37 मीटर बढ़ा
- मणिकर्णिका घाट पर शवदाह की जगह नहीं, छतों पर जल रही चिताएं
- प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी, जलस्तर लगातार निगरानी में
Highlights:
- गंगा का जलस्तर 24 घंटे में 1.37 मीटर बढ़ा
- मणिकर्णिका घाट पर शवदाह की जगह नहीं, छतों पर जल रही चिताएं
- प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी, जलस्तर लगातार निगरानी में
Ganga Flood Varanasi: काशी में गंगा का जलस्तर (Water Level) तेजी से बढ़ रहा है। प्रयागराज से बलिया तक लगातार हो रही पहाड़ी वर्षा और सहायक नदियों के उफान ने गंगा की धारा को रफ्तार दे दी है। बुधवार को महज 24 घंटे में जलस्तर में 72 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुबह आठ बजे तक यह 63.85 मीटर था, लेकिन दोपहर होते-होते प्रवाह की गति दोगुनी हो गई। शाम आठ बजे तक जलस्तर 64.50 मीटर तक पहुंच गया।
गंगा का उफान इतना तेज है कि घाट की सीढ़ियां एक-एक कर डूबने लगीं। दोपहर बाद सभी घाटों के बीच संपर्क टूट गया। गंगा सेवा निधि का कार्यालय पानी में घिर गया। नतीजतन विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती (Ganga Aarti) का स्थल 30 फीट पीछे शिफ्ट करना पड़ा। यह लगातार दूसरा दिन था जब आरती स्थल में बदलाव किया गया।
गंगा किनारे के मंदिरों में पानी घुस गया है। कई छोटे मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। ऊपर के मंदिरों में भी पानी भर गया है। हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर शवदाह (Cremation) का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हरिश्चंद्र घाट की गलियों में चिता जलाई जा रही है तो मणिकर्णिका घाट की छतों का सहारा लिया जा रहा है।
मणिकर्णिका घाट पर जगह पड़ा कम
मणिकर्णिका घाट पर निर्माण के कारण तीन प्लेटफॉर्म पहले ही तोड़े जा चुके हैं। ऐसे में जलस्तर बढ़ने से शवदाह की जगह और कम हो गई है। दुकानदारों ने आशंका जताई है कि यदि जलस्तर और चढ़ा तो लकड़ियां बह सकती हैं। इसी कारण उन्होंने स्टॉक कम करना शुरू कर दिया है।
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घाटों पर रहने वाले पुरोहित (Priests) भी अपनी चौकियां और धार्मिक सामग्री ऊपर शिफ्ट करने में जुटे हैं। दिनभर घाटों पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। घाट से गली तक हर तरफ पानी का ही दृश्य दिखा। गंगा सेवा निधि के पदाधिकारियों ने बताया कि आरती स्थल का लगातार पीछे खिसकाना पड़ा है और यदि जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो अगले दो दिनों में आरती आयोजन मुश्किल हो सकता है।
अब खतरा यह है कि यदि जलस्तर में वृद्धि की यह रफ्तार जारी रही तो गंगा खतरे के निशान को पार कर सकती है। प्रशासन और जल आयोग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि घाटों के निकट न जाएं।

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