Highlights:
- किस पैसे का दान करने से पाप नहीं धुलता?
- पुण्य पाने के लिए जरूरी है कि शुद्ध दान।
- गलती हो जाए तो पश्चाताप करो।
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- किस पैसे का दान करने से पाप नहीं धुलता?
- पुण्य पाने के लिए जरूरी है कि शुद्ध दान।
- गलती हो जाए तो पश्चाताप करो।
आजकल के जमाने में पैसे कमाने के तरीके बहुत बदल गए हैं। कई बार लोग झूठ, धोखा या रिश्वत से पैसा कमा लेते हैं। फिर यह सोचकर उस पैसे का दान कर देते हैं कि इससे उनका पाप धुल जाएगा और पुण्य मिलेगा। लेकिन वृंदावन के जाने-माने संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि यह सोच गलत है।
वे अपने सत्संग में साफ तौर पर कहते हैं कि गलत कमाई का दान व्यर्थ जाता है और इससे पुण्य की जगह और पाप लगता है। हमेशा अच्छे मन से किया गया दान और सही तरीके से कमाए गए पैसे का दान ही पुण्य दिलाता है। जो लोग सोचते हैं कि दान करके पाप से बच जाएंगे तो ऐसा नहीं होता है।
गलत कमाई दान करने से पुण्य क्यों नहीं मिलता?
संत प्रेमानंद जी कहते हैं कि जैसे चोरी का सामान मंदिर में चढ़ाने पर भगवान खुश नहीं होते हैं, वैसे ही गलत तरीके से कमाए पैसे का दान भी वे स्वीकार नहीं करते। शास्त्रों के अनुसार, दान तभी सफल होता है और शुभ फल देता है जब वह मेहनत और ईमानदारी से कमाए शुद्ध पैसे से किया जाए।
गलत कमाई तो पाप का ही एक रूप है। ऐसे पैसे का दान करने से सामने वाले व्यक्ति को तो कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन जो व्यक्ति दान कर रहा है, उसे कोई पुण्य नहीं मिलता। ऐसा करने से व्यक्ति के पाप में सिर्फ वृद्धि ही होती है।
दान में शुद्धता क्यों है जरूरी?
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि असल दान तीन चीजों से मिलकर बनता है: शुद्ध मन, शुद्ध पैसा और शुद्ध श्रद्धा। अगर पैसा ही गंदा है तो दान भी अपवित्र हो जाता है। गीता और अन्य शास्त्रों में दान के लिए तीन शुद्धता जरूरी बताई गई हैं – दान देने वाले का शुद्ध होना, पैसे का शुद्ध होना और दान लेने वाले का शुद्ध होना।
गलत पैसे से दान करके कोई अपने पाप नहीं धो सकता। महाराज जी कहते हैं कि आज लोग यह समझते हैं कि दान के बल पर सारे पाप कट जाएंगे, लेकिन भगवान का हिसाब बहुत बारीक होता है। सच्चा पुण्य तो ईमानदारी की कमाई और अच्छे मन से किए दान से ही मिलता है।
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अगर गलत कमाई हो गई है तो क्या करें?
महाराज जी ने लोगों को सलाह दिया है कि अगर गलत तरीके से पैसा कमाया है तो सबसे पहले पश्चाताप करो। फिर उस पैसे को वापस उसके असली मालिक को लौटा दो या फिर बिना किसी शोर-शराबे के किसी जरूरतमंद को दे दो। लेकिन इससे पुण्य की उम्मीद मत रखो।
उनका कहना है कि गलती सुधारने का सबसे बड़ा उपाय है राधा नाम का जप। राधा नाम के जप से सारे पाप जल जाते हैं। सच्चे मन से नाम जपो। अपनी गलती के लिए माफी मांगो और आगे से सही रास्ते पर चलने का वादा करो। दान तब करो जब पैसा शुद्ध तरीके से कमाओ।
दान का सही तरीका क्या है?
संत प्रेमानंद जी महाराज भक्तों को समझाते हुए कहते हैं कि दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अच्छे मन और मेहनत की कमाई से दान करो। भक्ति और नाम जप से मन शुद्ध होता है और फिर गलत कमाई करने का ख्याल ही दिल में नहीं आता।
वे कहते हैं कि राधा नाम में लीन हो जाओ। इस भौतिक संसार में पैसे की फिक्र छोड़ दो। भगवान सब कुछ देते हैं। गलत पैसे का दान पुण्य नहीं देता बल्कि यह और कर्म के बंधन में बांधता है। सच्ची भक्ति और ईमानदारी से किए गए काम ही असली पुण्य दिलाते हैं।

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