नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार को मिल रही Z+ सुरक्षा को वापस लेने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति पर संभावित खतरे का आकलन करना और उसपर फैसला लेना सरकार का काम है।
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने बांबे हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी। बता दें कि बांबे हाईकोर्ट ने पिछले दिनों अपने आदेश में कहा था कि अपने ऊपर खतरे की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के लिए पूरी कीमत चुकाने को तैयार व्यक्ति को Z+ सुरक्षा देना राज्य सरकार का दायित्व है।
इस संबंध में हाईकोर्ट ने कहा था कि अंबानी परिवार सुरक्षा पर आने वाला पूरा खर्च वहन करने को तैयार है। ऐसे मामले में मुंबई पुलिस के पास संबंधित व्यक्ति को उच्च स्तरीय जेड प्लस सुरक्षा दने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इसी के संबंध में एक जनहित याचिक दायर की गई थी। जनहित याचिका में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी और उनके परिवार को मिल रही जेड प्लस की सुरक्षा की समीक्षा का आग्रह किया गया था।

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