नई दिल्ली। संसद हमले से चर्चा में आए, कश्मीर के कुलगाम में दो आतंकियों के साथ पकड़े गए डीएसपी देविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में सामने आया है कि डीएसपी और आतंकियों के बीच 12 लाख में डील हुई थी। इसके बदले में वह आतंकियों को सुरक्षित चंडीगढ़ ले जाने वाला था।
डीएसपी ने अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बकायदा 4 दिनों को छुट्टी भी ली थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस और आतंकियों के बीच इस गठजोड़ से सुरक्षा एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है। ऐसे में अब आइबी और रॉ जैसी केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त जांच इस हरकत की गांठ खुलेगी।
संसद पर हमला में भी उछला था देविंदर सिंह का नाम
खबरों के मुताबिक, कुख्यात आतंकियों के लिए हथियारों की डील का जिम्मा भी इसी डीएसपी के पास ही था। फिलहाल इस मामले में सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ कर रही है, संभावना है कि पूछताछ के बाद कई बड़े मामले का खुलासा हो सकता है। बता दें कि डीएसपी देविंदर सिंह का भारतीय संसद पर हमला होने के बाद भी सामने आया था।

रविवार को राज्य पुलिस के महानिरीक्षक विजय कुमार ने कहा कि डीएसपी देविंदर सिंह ने बहुत ही जघन्य अपराध किया है। डीएसपी श्रीनगर एयरपोर्ट जैसे अति संवेदनशील जगह पर तैनात था। हालांकि विजय कुमार ने कहा कि इसके लिए पूरी पुलिस को दोषी नहीं माना जा सकता।
मीडिया खबरों के मुताबिक, नवीन ने रवाना होने से पहले अपने भाई को फोन किया था। फोन पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों के सर्विलांस पर था। जिसके बाद पुख्ता सबूत के आधार पर वाहन को रोका गया।
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बताया जा रहा है कि आतंकी नवीद पुलिस का भगौड़ा था। वह साल 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया था। गृह मंत्रालय चाहता है कि ऐसे अधिकारियों की पहचान की जाए जो आतंकियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसलिए पुलिस विभाग के अधिकारियों की स्क्रीनिंग होगी।
संसद पर हमला होने के बाद आया था नाम
बता दें कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी देविंदर सिंह का नाम संसद हमले के बाद भी चर्चा में आया था। अफजल ने दावा किया था कि कार देविंदर सिंह ने ही उपलब्ध करवाई थी। हालांकि पुलिस महानिरीक्षक कश्मीर विजय कुमार ने इस बात से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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