भोपाल। राहुल गांधी ने काफी चर्चा के बाद कमलनाथ के अनुभव को वरीयता देते हुए उन्हें मध्य प्रदेश का नया सीएम बनाने का फैसला किया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा तक कह दिया था और कांग्रेस से उनका रिश्ता काफी पुराना है। हालांकि राहुल के इस फैसले के पीछे बीजेपी का डर भी बताया जा रहा है।
बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर हुई। जिसमें कांग्रेस भी बहुमत के आंकड़े 116 से दो कदम दूर 114 पर ही रह गई है। उधर 15 साल राज्य पर शासन कर चुकी बीजेपी के पास भी 109 सीटें हैं और बीजेपी बहुमत से सिर्फ 7 कदम ही दूर है। ऐसे में कांग्रेस के लिए ज़रूरी था कि सीएम जैसा ज़रूरी पद किसी अनुभवी के पास हो।
ऐसी ख़बरें थीं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी कार्यकर्ता सीएम की कुर्सी पर देखना चाहते थे और काफी हद तक राहुल गांधी उन्हें सीएम बनाने के लिए मन भी बना चुके थे, लेकिन सोनिया गांधी ने कमलनाथ के ‘अनुभव’ पर भरोसा करने के लिए कहा। जिसके बाद सारे समीकरण धरे के धरे रह गए और कमलनाथ के नाम पर मुहर लग गई।
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सोनिया ने ऐसा मध्य प्रदेश में जीत का अंतर काफी कम होने के मद्देनजर किया। जीत के कम अंतर को देखते हुए अगर बीजेपी ने सीटों की जोड़-तोड़ की कोशिश की तो कमलनाथ जैसा पुराना नेता इससे ज्यादा बेहतर तरीके से निपट सकेगा।

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