‘मन की बात’ में बोले पीएम, दिमाग से भी जानी चाहिए लाल बत्ती

                         “1 मई का दिन का एक और महत्व है। दुनिया के कई भागों में उसे ‘श्रमिक दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है और जब ‘श्रमिक दिवस’ की बात आती है, लेवर की चर्चा होती है तो मुझे बाबा साहब अंबेडकर की याद आती है। आज श्रमिकों को जो सहुलियतें मिली हैं, जो आदर मिला है, उसके लिये हम बाबा साहब के आभारी हैं”

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नई दिल्ली। मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को संबोधित किया। मन की बात का यह 31 वां संस्करण है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लाल बत्ती को लोगों को अपने दिमाग से भी निकाल देना चाहिए। अपने कार्यक्रम के जरिए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश से वीआईपी संस्कृति को बदलकर ईपीआई (हर व्यक्ति महत्वपूर्ण) संस्कृति कर दिया जाय।

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पीएम मोदी ने कहा कि ‘हमारे देश में वीआईपी संस्कृति के लिए एक प्रकार की नफरत है, लेकिन जब सरकार ने गाड़ियों से लाल बत्ती हटाने का फैसला किया तब मैंने महसूस किया कि यह नफरत कितनी भीतर तक घुसी है। बता दें कि मन की बात में पीएम मोदी आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाते हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों को इन दोनों राज्यों की स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। दोनों राज्यों का स्थापना दिवस एक मई को मनाया जाता है।

दोनों राज्यों को शुभकामना देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘मैं गुजरात और महाराष्ट्र के नागरिकों को बधाई देता हूं। दोनों राज्यों ने लगातार प्रगति की ऊंचाइयों पर पहुंचने का प्रयास किया है और देश के विकास में योगदान दिया है। दोनों राज्यों में कई महान लोगों का जन्म हुआ है, जो हमें निरतंर प्रेरित करते हैं।’ लाल बत्ती पर अपनी बात रखते हुए पीएम ने कहा कि यह लाल बत्ती वीआईपी संस्कृति की सूचक बन गई है। जो हमारे दिमाग में भीतर तक घुसी है। इसे हटाना हमारी प्रणाली का एक हिस्सा भर है। इसे सफल बनाने के लिए इस संस्कृति को अपने दिमाग से हटाने का प्रयास करना होगा। 

पीएम मोदी ने श्रमिक दिवस पर बोलते हुए कहा कि 1 मई का दिन का एक और महत्व है। दुनिया के कई भागों में उसे ‘श्रमिक दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है और जब ‘श्रमिक दिवस’ की बात आती है, लेवर की चर्चा होती है तो मुझे बाबा साहब अंबेडकर की याद आती है। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि आज श्रमिकों को जो सहुलियतें मिली हैं, जो आदर मिला है, उसके लिये हम बाबा साहब के आभारी हैं। श्रमिकों के कल्याण के लिये उन्होंने अविस्मरणीय योगदान दिया है।

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