Highlights:
- परवेज मुशर्रफ ने गुप्त रूप से शुरू किया था ऑपरेशन बद्र।
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना की अन्य शाखाओं को भनक तक नहीं थी।
- पाक सेना की धमकी को आधार बनाकर मिली सीमित एयरस्ट्राइक की मंजूरी।
Highlights:
- परवेज मुशर्रफ ने गुप्त रूप से शुरू किया था ऑपरेशन बद्र।
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना की अन्य शाखाओं को भनक तक नहीं थी।
- पाक सेना की धमकी को आधार बनाकर मिली सीमित एयरस्ट्राइक की मंजूरी।
Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध की असली वजह पाकिस्तान का ‘ऑपरेशन बद्र’ था। उस समय पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने गुप्त रूप से इस योजना को अंजाम दिया। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी कैबिनेट को इस ऑपरेशन के बारे में बेहद कम जानकारी थी।
मुशर्रफ की इस गुप्त योजना को लेकर पाकिस्तान की नौसेना और वायुसेना भी अनजान रही। खुद मुशर्रफ इतनी गोपनीयता बरत रहे थे कि वे एक हेलीकॉप्टर से एलओसी पार कर अग्रिम पंक्ति में तैनात सैनिकों से मिलने भी गए।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद उलझन भरी थी। यह तय करना मुश्किल हो गया था कि कारगिल में हो रही घुसपैठ को किस स्तर का सैन्य अभियान मानकर जवाब दिया जाए। इस अनिश्चितता के कारण भारतीय वायुसेना को समय पर हरी झंडी नहीं मिल सकी।
तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक अपनी किताब ‘फ्रॉम सरप्राइज टू विक्टरी’ में लिखते हैं कि कई बार रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने वायुसेना के इस्तेमाल को लेकर रोक लगाई। उन्हें चिंता थी कि वायु हमले से युद्ध बढ़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को सफाई देनी पड़ सकती है।
वाइस चीफ ऑफ एयरस्टाफ चंद्रशेखर ने जनरल मलिक का समर्थन किया
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18 मई 1999 को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में वाइस चीफ ऑफ एयरस्टाफ चंद्रशेखर ने जनरल मलिक का समर्थन किया और कहा कि इस अपमानजनक स्थिति में वायुसेना की जरूरत है। लेकिन सीसीएस ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनका मानना था कि एक छोटी सी गलती से भारत-पाकिस्तान के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ सकता है।
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख मुशर्रफ को पहले ही अंदेशा था कि भारत वायुसेना का इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने धमकी दी थी कि यदि भारत एयर पावर या मिसाइलों का उपयोग करेगा तो पाकिस्तान जवाबी हमला करेगा। लेकिन यही चेतावनी भारत के पक्ष में गई। इसे आधार बनाकर भारतीय सैन्य नेतृत्व ने राजनीतिक नेतृत्व को सीमित वायु हमलों की अनुमति देने के लिए तैयार कर लिया।
भले ही देरी से मंजूरी मिली, लेकिन वायुसेना की सटीक बमबारी ने युद्ध का रुख पलट दिया। पाकिस्तानी सैनिक पीछे हटने को मजबूर हुए और भारत ने कारगिल की ऊंचाइयों पर फिर से कब्जा कर लिया। यह फैसला भारत की जीत में निर्णायक साबित हुआ।

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