Highlights:
- सुल्तानगंज एयरपोर्ट बनेगा बिहार का पहला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा
- DGCA ने साइट क्लियरेंस के लिए मांगी विस्तृत रिपोर्ट
- मंजूरी मिलने पर भागलपुर को मिलेगी सीधी हवाई कनेक्टिविटी
Highlights:
- सुल्तानगंज एयरपोर्ट बनेगा बिहार का पहला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा
- DGCA ने साइट क्लियरेंस के लिए मांगी विस्तृत रिपोर्ट
- मंजूरी मिलने पर भागलपुर को मिलेगी सीधी हवाई कनेक्टिविटी
बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में प्रस्तावित हवाई अड्डा राज्य का पहला और देश का 22वां ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनने जा रहा है। इस दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए वायुयान संगठन निदेशालय ने साइट क्लियरेंस की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए भागलपुर जिला प्रशासन से जरूरी तकनीकी और भूगर्भीय दस्तावेज मांगे गए हैं।
DGCA के निदेशक निलेश रामचंद्र देवरे ने भागलपुर के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर चार अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया का 1:50000 स्केल का टोपोग्राफी मैप शामिल है। इस मैप में प्रस्तावित एयरपोर्ट स्थल के 30 किलोमीटर के दायरे की पूरी भौगोलिक जानकारी देनी होगी।
कंटूर सर्वे और फ्लड असेसमेंट की रिपोर्ट मांगी गई
इसके अलावा कंटूर सर्वे और फ्लड असेसमेंट रिपोर्ट भी मांगी गई है। कंटूर सर्वे से यह पता चलता है कि जमीन समतल है या ढलान वाली और बारिश के पानी का बहाव किस दिशा में होगा। यह जानकारी एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट में ड्रेनेज सिस्टम और सुरक्षित निर्माण के लिए बेहद जरूरी होती है।
DGCA ने विंड रोज डायग्राम और जमीन से जुड़े अन्य तकनीकी डाटा के साथ साइट क्लियरेंस फॉर्म भी मांगा है। इन दस्तावेजों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि प्रस्तावित जगह पर हवाई अड्डा बनाना तकनीकी रूप से सुरक्षित और उपयुक्त है या नहीं।
फिलहाल देश में 21 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हैं जिनमें से 12 पर उड़ानें शुरू हो चुकी हैं जबकि 9 अभी निर्माण प्रक्रिया के चरण में हैं। अगर सुल्तानगंज एयरपोर्ट को मंजूरी मिलती है तो यह बिहार के लिए हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट क्या होता है?
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट उस हवाई अड्डे को कहा जाता है, जिसे बिल्कुल नई और खाली जमीन पर शुरू से बनाया जाता है। ऐसी जगह पर पहले कोई हवाई अड्डा या बड़ा बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं होता।
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ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट में हर चीज नए सिरे से डिजाइन की जाती है। इसमें रनवे, टर्मिनल बिल्डिंग, टैक्सीवे, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाएं आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। इसका मकसद भविष्य की हवाई यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर बेहतर और आधुनिक एयरपोर्ट बनाना होता है।
इसके उलट, ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट उस हवाई अड्डे को कहा जाता है, जहां पहले से मौजूद एयरपोर्ट का विस्तार किया जाता है या पुराने ढांचे का नवीनीकरण कर उसे दोबारा विकसित किया जाता है। इसमें जमीन और कुछ सुविधाएं पहले से होती हैं, सिर्फ उन्हें अपग्रेड या बढ़ाया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो नई जमीन पर बना बिल्कुल नया हवाई अड्डा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होता है, जबकि पुराने एयरपोर्ट को सुधारकर विकसित करना ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट कहलाता है।
अभी देश में किन जगहों पर है ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
- दुर्गापुर, शिर्डी, कन्नूर, पक्योंग, कलबुर्गी, करनूल, सिंधुदुर्ग, कुशीनगर, हालोन्गी, मोपा, शिवमोगा, राजकोट (ये 12 चालू हैं)
- नवी मुंबई, जेवर, विजयपुरा, हासन, धोलेरा, डबरा, कराइकल, दगादर्थी और भोगलपुरम (ये 9 प्रक्रियाधीन हैं)।

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