नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक की। रिजर्व बैंक ने अपनी अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर यथावत रखा। लगातार दूसरी बैठक में रेपो दर को स्थिर रखा गया है। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों की गुरुवार को घोषणा करते हुए कहा कि जब तक संभव है, वह नीतिगत रुख को उदार बनाये रखेगा।
केंद्रीय रिजर्व बैंक ने आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 में पांच प्रतिशत रहने के अनुमान को बनाये रखा। बैंक ने कहा कि आर्थिक वृद्धि 2020-21 में सुधरकर छह प्रतिशत हो सकती है। आर्थिक वृद्धि दर अभी भी अपनी संभावित क्षमता से कम है। आर्थिक गतिविधियां नरम बनी हुई हैं। जिन चुनिंदा संकेतकों में हालिया समय में सुधार देखने को मिला है, व्यापक स्तर पर इनमें भी अभी तेजी आनी शेष है।
बैंक ने समीक्षा बैठक के बाद कहा कि वृद्धि दर की तुलना में मुद्रास्फीति की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति को लगता है कि स्थिति को यथावत रखा जाना चाहिये। निकट भविष्य में मुद्रास्फीति के उच्च बने रहने की आशंका है। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के परिदृश्य को बेहद अनिश्चित बताया।
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रिजर्व बैंक ने कहा कि कि मौद्रिक नीति समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो दर यथावत रखने का पक्ष लिया। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने फरवरी 2019 से अक्टूबर 2019 के दौरान रेपो दर में 1.35 प्रतिशत की कटौती की थी।

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