नई दिल्ली। 26 जुलाई को कारगिल दिवस (Kargil Vijay Diwas in India) मनाया जाता है। जुलाई 1999 में भारत और पाकिस्तान के इस युद्ध (Kargil War between Indian and Pakistan) में भारत की विजय हुई थी। दुनिया भारतीय सैनिकों (Indian Army) के युद्ध कौशल और शौर्य को देखकर नस्मस्तक थी। हिमालय की वर्फीली चोटियों में दुश्मन से लोहा लेकर कारगिल (Kargil Vijay Diwas in India) पर विजय तिरंगा फहराया गया था।
कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के शौर्य को दुनिया इसलिए सलाम करती है कि विपरित परिस्थितियों के वाबजूद भी युद्ध में विजय प्राप्त की। कारगिल की ऊंची चोटियों पर पाकिस्तान के सैनिकों का कब्जा था। लेकिन इसके बावजूद भारतीय सैनिक हिमालय की खड़ी चढ़ाई को मात देकर दुश्मन के दांत खट्टे कर रहे थे।
कारगिल युद्ध (Kargil Vijay Diwas in India) में भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। युद्ध में भारत के करीब 550 सैनिक शहीद हो गए और 1,400 के करीब जवान घायल हुए थे। कहा जाता है कि भारतीय जवान ने इस युद्ध में गजब की युद्ध क्षमता दिखाई थी। भारतीय सेना के पास संसाधन की कमी होने के वाबजूद जो शौर्य दिखाया वह एक अमर गाथा है।
कारगिल को बचाने के लिए भारतीय सेना के जवानों ने करो या मरो की नीति अपनाकर कर पाकिस्तान से अपनी माता स्वरूप जमीन को वापस पा लिया। भारतीय सेना के वीर जवानों ने पाकिस्तानी सेना को पीछे धकेल कर कारगिल के शिखर पर तिरंगा फहराया था। इस युद्ध (Kargil Vijay Diwas in India) में विक्रम बत्रा, योगेंद्र यादव, हनीफउद्दीन और मनोज पांडे की वीर गाथा को कौन नहीं जानता है।
रणभूमि में दुश्मन के दांत खट्टे कर इन भारत के वीर सपूतों ने दुश्मन के सामने अपनी माता स्वरूप भूमि को दुश्मन के कब्जे से मुक्त करा लिया। भारतीय सेना के वीर जवानों की शौर्यगाथा से हर कोई परिचीत है। जिस वक्त कारगिल युद्ध लड़ा जा रहा था उसवक्त भारतीय सेना के पास युद्ध के कई उपकरण नहीं थे।
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तब भारतीय सेना के तत्कालीन सेनाध्यक्ष वेद प्रकाश मलिक ने कहा था कि हमारे पास जो कुछ भी है, हम उसी के सहारे लड़ेंगे। द विक के दिए एक साक्षात्कार में डीजी जनरल एनसी विज ने कहा था कि हमारे पास खुफिया तंत्र बहुत बढ़िया नहीं था। उन्होंने हमे स्पष्ट सूचनाएं मुहैया नहीं कराईं, और जो सूचनाएं मिलीं वह हमारे काम की नहीं थी।
जुलाई 1999 में हुए इस युद्ध में भारत ने 26 जुलाई को पूर्ण विजय प्राप्त कर ली। कारगिल युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के 3000 से अधिक सैनिको को मार गिराया। यह युद्ध इसलिए अधिक कष्टपूर्ण था क्योंकि यह युद्ध हिमालय की दुर्गम चोटियों में 18 हजार फीट की ऊँचाई पर लड़ा जा रहा था।
कारगिल दिवस को इन्ही वीर जवानों के वलिदान और कारगिल पर तिरंगा फहराने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। युद्ध में कैप्टन विक्रम बतरा के उस कथन को याद किया जाता है जब उन्होंने कारगिल के प्वॉइंट 4875 पर तिरंगा फहराते हुए कहा था, ‘दिल मांगे मोर’। तिरंगा फहराने के बाद कैप्टन उसी जगह पर वीर गति को प्राप्त हो गए। यह चोटी आज भी बतरा टॉप के नाम से मशहूर है।

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