Highlights:
- RBI का नया नियम हर 15 दिन में Cibil Score अपडेट करने का है।
- Soft Inquiry स्कोर को प्रभावित नहीं करती, Hard Inquiry करती है।
- बार-बार लोन अप्लाई करने और पेमेंट लेट करने से स्कोर घट सकता है।
Highlights:
- RBI का नया नियम हर 15 दिन में Cibil Score अपडेट करने का है।
- Soft Inquiry स्कोर को प्रभावित नहीं करती, Hard Inquiry करती है।
- बार-बार लोन अप्लाई करने और पेमेंट लेट करने से स्कोर घट सकता है।
Reserve Bank of India (RBI) ने Cibil Score अपडेट से जुड़ा नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब हर महीने की 15 तारीख और महीने के अंत में स्कोर अपडेट होगा। इस बदलाव से बैंकों और NBFCs (Non-Banking Financial Companies) को अपने ग्राहकों के क्रेडिट डेटा को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट करना जरूरी हो गया है।
ऐसा इसलिए ताकि ग्राहकों के खाते की स्थिति और भुगतान हिस्ट्री (Payment History) तुरंत स्कोर में दिख सके। अगर इस प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया या डेटा देर से भेजा गया तो Cibil Score गिर सकता है और लोन अप्रूवल में दिक्कतें आ सकती हैं।
Cibil Score कैसे बनता है और क्या हैं नई शर्तें
Cibil Score तीन अंकों का एक नंबर होता है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और भरोसेमंद भुगतान व्यवहार को दर्शाता है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है और 750 या उससे ऊपर का स्कोर “अच्छा” माना जाता है। RBI ने साफ कर दिया है कि बार-बार स्कोर चेक करने से कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक वह Soft Inquiry है।
अगर बैंक या लोन कंपनी Hard Inquiry करती है तो स्कोर घट सकता है। अब नया नियम बताता है कि अगर कोई संस्था बार-बार Hard Inquiry करती है तो उसका असर पहले की तुलना में ज्यादा गहराई से पड़ेगा।
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स्कोर गिरने के कारण और बचाव के उपाय
RBI ने चेतावनी दी है कि स्कोर गिरने के पीछे सिर्फ लोन या क्रेडिट कार्ड की देरी से पेमेंट ही वजह नहीं होती। Credit Utilization Ratio, बार-बार लोन अप्लाई करना या किसी और के लोन का गारंटर बनना भी स्कोर को प्रभावित करता है।
ऐसे में जरूरी है कि आप हर बिल और लोन की EMI समय पर भरें। अगर स्कोर कम है तो लगातार तीन से छह महीने तक सही पेमेंट करने से स्कोर फिर से 750+ तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्कोर हमेशा Cibil की आधिकारिक वेबसाइट या RBI द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से ही चेक करें ताकि डेटा सुरक्षित और सटीक रहे।

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