Highlights:
- जंगल में एक चतुर बकरी रहती थी।
- बकरी एक बार बाघ के सामने आ गई।
- फिर उसने इस तरीके से अपनी जान बचाई।
Highlights:
- जंगल में एक चतुर बकरी रहती थी।
- बकरी एक बार बाघ के सामने आ गई।
- फिर उसने इस तरीके से अपनी जान बचाई।
एक घने जंगल में एक छोटा-सा गांव था। गांव के पास ही एक झरना था। इस झरने के पास जंगल के जानवर पानी पीने आते थे। एक दिन की बात है, एक भूखा बाघ उस झरने के पास छिपकर बैठ गया। बाघ इस ताक में था कि कोई जानवर आए तो उसे शिकार बना सके।
थोड़ी देर बाद एक बकरी पानी पीने आई। बाघ ने मौका देखा और झाड़ियों से निकलकर उसके सामने आ गया। बकरी का दिल जोरों से धड़कने लगा। भागने का कोई रास्ता नहीं था। लेकिन वह बहुत चतुर थी। उसने तुरंत अपना डर छुपाया और बाघ के सामने सिर झुकाकर बोली: “प्रणाम, महाराज!”
बाघ हैरान रह गया। उसने आज तक किसी शिकार को इतनी निडरता से सामने होकर बात करते नहीं देखा था। उसने गुर्राकर पूछा, “तू मुझसे डरती क्यों नहीं? क्या तुझे पता नहीं मैं इस जंगल का राजा हूं?”
बकरी बोली, “महाराज, मैं तो आपसे मिलने के लिए ही यहां आई हूं। भगवान ने मुझे सपने में आकर आपके पास आने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आज आपके भोजन का प्रबंध उन्होंने खुद किया है। आप यहीं बैठिए।”
बाघ और भी उलझन में पड़ गया। “क्या मतलब? भोजन कहां है?” बकरी ने कहा, “महाराज, मैं सिर्फ एक छोटी सी बकरी हूं। मुझे खाकर आपका पेट कैसे भरेगा? भगवान ने आपके लिए एक बड़ा भोजन तैयार करके रखा है। आप मेरे पीछे चलिए।”
चतुर बकरी बाघ को जंगल के उस छोर पर ले गई, जहां पर एक गहरा कुआं था। उसने कुएं के किनारे जाकर कहा, “देखिए महाराज, भगवान ने आपके लिए यहां एक मोटा और ताजा हिरण छिपा रखा है। वह इस कुएं के अंदर है।”
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बाघ ने झुककर कुएं में देखा। पानी में उसकी अपनी परछाईं दिखाई दी। बाघ की यह परछाई एक बड़े धूर्त हिरण जैसी लग रही थी। उसने सोचा कि यही वह हिरण है जिसकी बकरी बात कर रही है।
लालच में आकर बाघ जोर से कुंए में कूदा। वह गहरे कुएं में गिर गया और डूबने लगा। बाघ मदद के लिए चिल्लाने लगा। बकरी ने कुएं के ऊपर से कहा, “अब आप यहीं आराम से भोजन करिए महाराज। मैं चलती हूं।”
इतना कहकर वह चतुर बकरी फुर्ती से वहां से भाग गई। उसने अपनी बुद्धि और शांत दिमाग से न सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि उस बाघ को एक सबक भी सिखा दिया।
कहानी से सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर दिमाग से काम लिया जाए तो बड़ी से बड़ी मुसीबत से भी बचा जा सकता है। घबराने और डरने की जगह शांति से सोचना चाहिए। बुद्धि हमेशा ताकत से बड़ी होती है।

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