Highlights:
- पीएम धन-धान्य कृषि योजना को कैबिनेट की मंजूरी
- 36 योजनाएं मिलाकर बनी एकीकृत योजना
- हर साल 24,000 करोड़ रुपये का खर्च
- किसानों को मिलेगा एकसाथ कई सुविधाओं का लाभ
- NLCIL को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश की मंजूरी
Highlights:
- पीएम धन-धान्य कृषि योजना को कैबिनेट की मंजूरी
- 36 योजनाएं मिलाकर बनी एकीकृत योजना
- हर साल 24,000 करोड़ रुपये का खर्च
- किसानों को मिलेगा एकसाथ कई सुविधाओं का लाभ
- NLCIL को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश की मंजूरी
केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM Dhan-Dhanya Agriculture Scheme) को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत सरकार हर साल ₹24,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना 36 मौजूदा योजनाओं को मिलाकर बनाई गई है, जिससे किसानों को एकीकृत रूप से लाभ मिल सकेगा।
इस नई योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाना है। खासकर उन किसानों को, जो अब तक विभिन्न योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे थे। अब एक ही छत के नीचे सभी प्रमुख योजनाओं को लाकर किसानों को सिंचाई, बीज, फसल बीमा, मार्केटिंग, क्रेडिट और मशीनरी जैसी सुविधाएं बेहतर ढंग से दी जा सकेंगी।
नवीकरणीय ऊर्जा पर भी बड़ा निवेश
कैबिनेट ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को 7,000 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी है। यह राशि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगाई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि देश को हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ाया जाए और इसके लिए बड़े स्तर पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा।
कृषि और ऊर्जा दोनों पर फोकस
इस कैबिनेट मीटिंग से साफ है कि PM Dhan-Dhanya Agriculture Scheme के माध्यम से सरकार अब एक साथ कृषि सुधार और ऊर्जा संक्रमण दोनों पर फोकस कर रही है। एक ओर किसान को आर्थिक सुरक्षा और संसाधनों की सुविधा दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर देश की ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण के अनुकूल दिशा में ले जाने की तैयारी हो रही है।
पीएम धन-धान्य योजना के लाभ
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना किसानों के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकती है, क्योंकि इसके जरिए अब 36 अलग-अलग योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया गया है। इससे किसानों को हर योजना के लिए अलग-अलग आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जरूरी सुविधाएं जैसे बीज, खाद, सिंचाई, मशीनरी, फसल बीमा और मार्केटिंग अब एक ही योजना के तहत मिलेंगी।
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इससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि किसानों का समय और कागज़ी झंझट भी कम होगा। सरकार इस योजना पर हर साल 24,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा।
इस योजना के तहत किसानों की खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। उन्नत बीज, आधुनिक सिंचाई तकनीक और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी मिलेगी। छोटे और मझोले किसान भी आधुनिक खेती अपना सकेंगे। साथ ही फसल बीमा और आसान कृषि ऋण की सुविधा से उन्हें नुकसान की स्थिति में आर्थिक राहत भी मिलेगी।
सरकार किसानों को मंडी और बाजार से सीधा जोड़ने की कोशिश कर रही है ताकि उनकी फसल को सही कीमत मिल सके। कुल मिलाकर यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी आय बढ़ाने और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।

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