Fighter Aircraft : दुनिया के 6 सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान

डेस्क। आजकल दुनिया के तमाम देशों में सैनिक शक्ति को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने की होड़ लगी हुई है। ज्यादातर देश नया और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों (Fighter Aircraft) को खरीदना चाहता है। आज के समय में हवाई लड़ाई का रूख लड़ाकू विमानों की तरफ मुड़ गया है। जिस देश के पास ज्यादा ताकतवर विमान होगा वह देश अधिक शक्तिशाली होगा। जानते हैं दुनिया 6 सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों (Fighter Aircraft) के बारे में

1. F-22 रैप्टर – इस विमान का पूरा नाम है लॉकहीड मार्टिन एफ-22 रैप्टर। यह विमान अमेरिका द्वारा प्रयोग किया जाता है। इसे अमेरिका ने बनाया है। यह विमान 5वीं पीढ़ी का विमान है। इसे पांचवी पीढ़ी का सबसे खतरनाक विमान माना जाता है। इस विमान का लोकेशन दुनिया का कोई रडार नहीं पकड़ सकता है। इसमें ग्राउंड अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सिंग्नल इंटेलिजेंस ट्रैकर जैसी खूबियां मौजूद हैं।

F-22 का संक्षिप्त विवरण

  • अनुमानित लागत 150 मिलियन डॉलर
  • लगभग 195 यूनिट्स मौजूद
  • अनुमानित स्पीड 2,410 km/h

2. चेंगदू जे-20 (Chengdu J-20): यह विमान चाइना द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। यह एक मल्टीरोल (Fighter Aircraft) लड़ाकू विमान है। इस विमान का संचालन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। विमान वजन में काफी हलका है। इसका इस्तेमाल चाइना की पीपल लिब्रेशन आर्मी का एयरफोर्स विंग करता है। इस विमान को पीपल रिपब्लिक ऑफ चाइना चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने बनाया है।

चेंगदू जे-20 का संक्षिप्त विवरण

  • लेजर गाइडेट बम और सेटेलाइट गाइडेड बमों से लैस
  • अधिक्तम स्पीड 2,100 किमी प्रति घंटा
  • 45 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम
  • एक विमान की लागत 110 मिलियन डॉलर

3. सुखोई Su-57 (T-50): इस विमान का निर्माण भारत और रूस के प्रयास से किया जा रहा है। इसे रूसी और भारतीय वायुसेना इस्तेमाल करेगी। यह एक सिंगल सीटर (Fighter Aircraft) मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। इस विमान में दुनिया की सबसे उन्नत स्टील्थ टेक्नोलॉजी द्वारा निर्मित किया जा रहा है।

सुखोई सु-57 का संक्षिप्त विवरण

  • एक श्रेष्ठ, सिंगल सीटर, दो इंजन जेट वाला विमान
  • पांचवी पीढ़ी का सबसे खतरनाक मल्टीरोल विमान
  • आंतरिक नाम टी-50
  • अधिक्तम उड़ान गति 2,140 किमी प्रति घंटा
  • एक विमान की लागत 40-45 मिलियन डॉलर
Rafale Fighter Aircraft

4. लॉकहीड मार्टिन एफ -35 लाइटनिंग: यह लड़ाकू विमान (Fighter Aircraft) संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। यह एक पांचवी पीढ़ी का विमान है। इस विमान को बनाने के प्रयास 2006 से ही किया जा रहा है। विमान की अभी तक कुल 13 यूनिट्स ही मौजूद हैं। विमान अभी निर्माण के चरण में है। इस विमान को सुपर एडवांस्ड कंप्यूटरों की मदद से ऑपरेट किया जाएगा। विमान रडार को चकमा देने में सक्षम।

लॉकहीड मार्टिन एफ-35 का संक्षिप्त विवरण

  • जमीन पर हमला करने में सक्षम
  • जासूसी सैनिक परीक्षण में इस्तेमाल
  • वायुरक्षा मिशन ऑपरेशन में सक्षम
  • एफ-35ए, एफ-35बी और एफ-35सी तीन मॉडल में उपलब्ध
  • अधिक्तम लागत – एफ-35ए (89.2 मिलियन डॉलर), एफ-35बी (115.5 मिलियन डॉलर) एफ-35सी (107.7 मिलियन डॉलर)
  • अधिकतम स्पीड 1,930 किमी प्रति घंटा

5. यूरोफाइटर टाइफून (Eurofighter Typhoon): यह विमान यूरोप की सबसे उन्नत और आधुनिक तकनीक से निर्मित विमान है। इस विमान को लेकर दावा किया जाता है कि यह विमान बड़ी ही आसानी से अमेरिका के एफ-22 रैप्टर का सामना कर सकता है। यह विमान एफ-15एफ और राफेल, सु-27 जैसे विमानों के अधिक ताकतवर है। इस विमान में मिसाइल भंडारण की क्षमता है जो इससे सबसे अलग करती है।

यूरोफाइटर टाइफून का संक्षिप्त विवरण

  • सबसे उन्नत और आधुनिक लड़ाकू विमान
  • अधिकतम गति 2,385 किमी प्रति घंटा
  • अधिकतम ऊंचाई उड़ान क्षमता- 55 हजार फीट
  • रडार की पकड़ से बाहर- 85 प्रतिशत हिस्सा कार्बन का बना हुआ (15 प्रतिशत मेटल का)

6. Rafale Fighter Jet: राफेल विमान फांस द्वारा निर्मित विमान है। इसे फ्रांस की वायुसेना इस्तेमाल करती है। भारत सरकार ने भी हाल ही में इस विमान की खरीद फ्रांस से की है। यह चौथे जेनेरेशन का मल्टीरोल (Fighter Aircraft) लड़ाकू विमान है। भारत के पास तेजस जैसा बेहतरीन लड़ाकू विमान भी है जो चौथे जेनेरेशन का है।

राफेल लड़ाकू विमान का संक्षिप्त विवरण

  • एक मिनट में 60 हजार फीट ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम
  • 17 हजार किलोग्राम इंधन भंडारण की क्षमता
  • मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट, सुखोई से छोटा आकार
  • हवा से जमीन पर 600 किमी तक निशाना लगाने में सक्षम
  • स्कल्प मिसाइल से लैस- स्कल्प मिसाइल का रेंज 300 किलोमीटर
  • विमान की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर
  • अधिकतम 24,500 किलो वजन ले जाने की क्षमता
  • रफ्तार 2,223 किलोमीटर प्रति घंटा, 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान क्षमता
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